कर्ज के बोझ से दबी पंजाब सरकार के लिए इस बार का बजट किसी चुनौती से कम नहीं है। वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा इस चुनावी साल में बजट के सहारे पर अपनी कार्यकुशलता का खाका जनता के सामने खींचेंगे, लेकिन पंजाब की आर्थिक हालत के मद्देनजर यह बजट कितना लोक लुभावन होगा, इस पर नजरें टिकी रहेंगी।
पंजाब सरकार के आर्थिक हालात किसी से छुपे नहीं हैं। ऐसे में बजट के जरिए सरकार क्या तस्वीर पेश करेगी, किसानों और युवाओं समेत हर वर्ग की नजर इस पर रहेगी। वित्त विभाग के अधिकारियों ने पूरी तरह से चुनावी बजट बनाने की तैयारी की है, लेकिन अब समय कम है। जो वादे सरकार पिछले कई साल में पूरे नहीं कर सकी, वे कुछ माह के कार्यकाल में कैसे पूरा करेगी यह सबसे बड़ी चुनौती है। अप्रैल से दिसंबर तक का समय बचा है।
दिसंबर के बाद से ही सरकार चुनावी मोड में आ जाएगी। कर्मचारियों से लेकर महिलाओं, उद्यमियों, युवाओं और किसानों की रीढ़ मजबूत करने के लिए यह समय नाकाफी है। कैग ने भी इस बात की नसीहत दी है कि सरकार कर्ज लेकर कर्ज उतारने की बजाए कर्ज घटाकर ब्याज का बोझ कम करने की तरफ ध्यान दे। बहरहाल चुनावी साल है लिहाजा इस बात का आश्वासन प्रदेश की जनता को दिया जा सकता है कि किसी नए कर से उन्हें बजट में रूबरू नहीं होना पड़ेगा। इस बार का बजट किसानों और युवाओं पर फोकस होगा।