हरभजन सिंह ने यह भी कहा कि राज्यपाल केंद्र के वक्ता के तौर पर काम न करें बल्कि राज्य के लोगों के हित में चुनी गई सरकार की इच्छाओं व सलाह के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पंजाब सरकार के हित में सुनाया फैसला प्रमाणित करता है कि राज्यपाल बजट सत्र बुलाने संबंधी राज्य सरकार द्वारा भेजे प्रस्ताव को किसी हालत में अस्वीकार नहीं कर सकते। राज्यपाल की तरफ से सांविधानिक मूल्यों को दरकिनार करते हुए सरकार की तरफ से बजट सत्र को बुलाने की मंजूरी न देना लोकतंत्रीय रिवायतों का उल्लंघन है।
राज्य सरकार की याचिका पर मंगलवार को पंजाब राजभवन की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि राज्यपाल की ओर से विधानसभा का बजट सत्र बुलाने की अनुमति दे दी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों को उनके सांविधानिक कर्तव्य निभाने की ताकीद की थी। इसके तुरंत बाद पंजाब आप की ओर से जारी बयान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा गया कि राज्यपाल, मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसलों को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं। फैसले से साफ हो गया कि ‘वास्तविक अर्थों में’ शक्ति निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होती है, मनोनीत राज्यपालों के पास नहीं।
अभिभाषण के मौके सदन में होगा आमना-सामना
हालिया विवाद के बाद, राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान का आमना-सामना पंजाब विधानसभा में 3 मार्च को शुरू हो रहे बजट सत्र में होगा। सत्र का आगाज सुबह 10 बजे राज्यपाल के अभिभाषण से होना है, जिससे पहले विधानसभा परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री मान ही पुष्पगुच्छ के साथ राज्यपाल का स्वागत करेंगे। इस मौके पर कुछ कैबिनेट मंत्री भी उनके साथ होंगे।
यह है विवाद
पंजाब के राज्यपाल और मान के बीच तनाव पिछले हफ्ते बढ़ गया था जब पुरोहित ने संकेत दिया था कि उन्हें विधानसभा का बजट सत्र बुलाने की कोई जल्दी नहीं है और उन्होंने मुख्यमंत्री को राजभवन के एक पत्र पर उनकी 'अपमानजनक' प्रतिक्रिया के बारे में याद दिलाया था। इसे लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को नसीहत दी थी।
शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों से कहा कि सांविधानिक विमर्श मर्यादा और परिपक्व राजकीय कौशल के साथ संचालित किया जाना चाहिए। इस बात पर जोर देते हुए कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री संविधान द्वारा निर्दिष्ट भूमिकाओं और दायित्वों के साथ सांविधानिक पदाधिकारी हैं। दोनों द्वारा संवैधानिक कर्तव्य का अपमान किया गया। इसमें कहा गया है कि राज्यपाल द्वारा मांगी गई जानकारी नहीं देना मुख्यमंत्री के सांविधानिक कर्तव्य की अवहेलना होगी जो राज्यपाल को बजट सत्र बुलाने के अपने सांविधानिक कर्तव्य का पालन नहीं करने देगी। अदालत ने यह भी कहा कि पंजाब के राज्यपाल के लिए बजट सत्र बुलाने के बारे में कानूनी सलाह लेने का कोई अवसर नहीं था क्योंकि वह मंत्रियों की सहायता और सलाह से बंधे हैं।