पंजाब विधानसभा में स्पीकर कुलतार सिंह संधवा की अनुमति से सदन में पंजाब बजट प्रस्ताव 2023 पर बहस हुई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब विधानसभा में शनिवार को बजट पर बहस का जवाब देते हुए प्रदेश के नए बजट को आम लोगों का बजट बताया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से शुक्रवार को सदन में पेश किए गए वर्ष 2023-24 के बजट पर शनिवार को करीब सात घंटे चली बहस के बाद, विपक्ष के गिने-चुने सदस्यों की मौजूदगी में पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने संबोधन में जहां बजट की विशेषताओं का उल्लेख किया, वहीं उन्होंने विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति और पिछली सरकारों की ओर से बजट पेश करने की परिपाटी पर तंज भी कसे। उन्होंने बहस के दौरान विपक्ष की ओर से कर्ज लेकर सरकार चलाने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पंजाब को लोगों को मुफ्त बिजली देने व आम आदमी क्लीनिक खोलने के बावजूद एक साल में 36 हजार करोड़ का कर्ज वापस किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने कर्ज लिया, लेकिन पिछला कर्ज उतारा भी है। पिछले साल कर्ज के मूलधन का 15946 करोड़ और कुल कर्ज पर ब्याज के रूप में 20100 करोड़ अदा किए थे। अब नए बजट में कर्ज का मूल 16626 करोड़ व ब्याज के रूप में 22000 रुपये अदा किया जाएगा। सदन में करीब 11 बजे से बजट पर चर्चा शुरू हुई। चर्चा में पक्ष और विपक्ष के 30 सदस्यों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने बहस पर चर्चा में जवाब की शुरुआत विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए की। उन्होंने कहा कि आधी कांग्रेस और भाजपा घर पहुंच गई है। जो बैठे हैं, उन्हें समझ आ गया होगा कि बैठे रहो तो बोलने का समय मिलता है। उन्होंने कहा कि यह आम लोगों को समझ आने वाला बजट है, जिसमें 26 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ वित्त मंत्री 2 लाख करोड़ रुपये के करीब ले गए हैं। लगभग हर क्षेत्र में बढ़ोतरी वाला बजट है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद ही पंजाब और पंजाब के लोगों की खातिर काम करना है। वित्त मंत्री ने जनता को राजस्व घाटा, प्रति व्यक्ति आय जैसे शब्दों में नहीं उलझाया, बल्कि सीधे तरीके समझ आने वाला और लोगों की भाषा में बजट पेश किया है। इससे पहले, शनिवार को सदन में बजट पर बहस में हिस्सा लेते हुए सत्ता पक्ष ने सदस्यों ने जहां बजट को बेहतरीन ठहराया वहीं विपक्ष ने महिलाओं को 1000 रुपये देने के वादे और मुलाजिमों के लिए ओपीएस के वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए बजट को आम लोगों के साथ धोखा बताया।
पहले के बजट में सिर्फ शेर-ओ-शायरी होती थी
उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल का नाम लिए बिना कांग्रेस पर तंज कसा कि कांग्रेस वाले वित्त मंत्री साहब जो आजकल भगवे हैं, पता नहीं कौन से देशों की भाषा में पंजाबियों को बजट समझाते और सुनाते रहे। बजट कम और शेर-ओ-शायरी ज्यादा। नौ बार बजट पेश कर गए। लेकिन शेर पुराने ही पढ़ते रहे। कांग्रेस डेपुटेशन पर वित्त मंत्री लाई थी। भाजपा के अश्विनी शर्मा के इस आरोप पर कि आप सरकार केंद्र की निंदा करती है और मांगने भी उनके पास ही जाती है, के जवाब में मान कहा कि क्या भीख मांग रहे हैं? हमारा हक है। अपना पैसा मांग रहे हैं, जो हमारे लोगों के टैक्स का पैसा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा कि अरविंद केजरीवाल की ओर से शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई तो 'फ्री की रेवड़ी' कहा गया। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि 15 लाख का पापड़ किसने बेचा था? हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने वाले कौन थे? रेल के डिब्बे में चाय बेचते थे। बड़े हुए तो रेल का डिब्बा ही बेच डाला। सब कुछ बेच दिया और मीडिया खरीद लिया।
आधुनिक स्कूलों में 80 फीसदी गरीब बच्चे पढ़ेंगे
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि भाजपा को पंजाब के बजट पर बोलना ही नहीं चाहिए। एससी-एसटी के लिए कम बजट के आरोपों का जवाब देते हुए मान ने कहा कि जो स्कूल बनेंगे, उनमें 80 फीसदी गरीबों के बच्चे पढ़ेंगे। मोहल्ला क्लीनिकों में भी गरीबों को इलाज मिलेगा। इन पर खर्च होने वाला पैसा आखिरकार 40 फीसदी आबादी को भी लाभ देगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया कि आप सरकार कर्ज लेकर काम चला रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा एक साल के अंदर 117 स्कूल ऑफ एमिनेंस की स्थापना, 500 से अधिक आम आदमी क्लीनिक, हरेक बिल पर 600 यूनिट मुफ़्त बिजली की सुविधा और 26,000 सरकारी नौकरियाँ दी गई हैं और इस सबके बावजूद हमारी सरकार ने पंजाब पर चढ़े हुए 36,000 करोड़ रुपए का कजऱ् एक साल में वापस कर दिया है।
चन्नी से पूछेंगे, अमेरिका में क्या सीखाः मान
पंजाब सरकार द्वारा 36 प्रिंसिपलों को सिंगापुर में ट्रेनिंग पर भेजे जाने के मामले में मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि कांग्रेस वाले एतराज जता रहे हैं कि सिंगापुर क्यों, अमेरिका क्यों नहीं भेजा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सदस्यों से कहा कि आपका आखिरी प्रिंसिपल चन्नी अमेरिका गया था। पीएचडी करने। क्या पढ़कर आया, उससे पूछेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने चन्नी को कैलिफोर्निया जाने से नहीं रोका। बल्कि चन्नी ने जब नहीं जाने का फैसला किया, उससे तीन दिन पहले ही उनके खिलाफ एलओसी जारी हो चुका था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की यूनिवर्सिटियों को घाटे में नहीं रहने दिया जाएगा। नए बजट में यूनिवर्सिटीज के लिए केवल 290 करोड़ रुपये का बजट रखे जाने को लेकर पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का वीडियो वायरल होने से उठे विवाद को विपक्ष ने हाथोंहाथ लेते हुए शनिवार को सरकार पर निशाना साधा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे की कोई भी यूनिवर्सिटी जब भी पैसों की मांग करेगी, सरकार हर हाल में उसे पैसा मुहैया कराएगी।
व्यापारियों को नहीं समझ आया जीएसटीः मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में जीएसटी को लेकर अलग अंदाज में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब तक व्यापारी ही समझ नहीं पाए हैं कि जीएसटी क्या है। उन्होंने कहा- "इसे ऐसे समझें। एक टीचर ने छात्र से पूछा, नीम के पेड़ पर जो दो केले लगे। जब नींबू पके और जो खरबूजा गिरा। तब नीचे बेर कितने थे? यही जीएसटी है। व्यापारी अब तक समझ नहीं पा रहे।"
मालगाड़ियां कराची के रास्ते ले जाया करो
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बजट बहस पर अपने भाषण के दौरान सूबे के थर्मल प्लांटों के लिए उड़ीसा से कोयला मंगाने के घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गैर-भाजपा शासित राज्य होने के कारण पंजाब को श्रीलंका से होकर गुजरात की बंदरगाह के रास्ते कोयला लाने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री के सामने यह बात रखी और कहा कि जब पंजाब से धान लेने की बारी होती तो सीधी ट्रेनें भेजकर धान उठा ली जाती है। अगली बार केंद्र सरकार ऐसा करे कि पंजाब से अन्य राज्यों को धान पहुंचाने के लिए मालगाड़ियां कराची के रास्ते ले जाया करे। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनके इसी तर्क पर केंद्र ने आर-एस-आर का फार्मूला वापस लिया है।