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भाजपा ने बिना मंजूरी बैनर लगाए बैनर, डेढ़ करोड़ तक लगेगा जुर्माना!

Thu, 14 Apr 2016 11:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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विजय सांपला, पंजाब भाजपा अध्यक्ष - फोटो : amar ujala
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नगर निगम ने पंजाब भाजपा पर बिना मंजूरी के बैनर, पोस्टर और झंडे लगाने के मामले में ज्वाइंट कमिश्नर वीरेंद्र चौधरी ने ओएसडी को रिकवरी का डिटेल बनाने का निर्देश दिया है। नोटिस भेजने का फैसला सोमवार को कमिश्नर बी पुरुषार्था लेंगे। 
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भारतीय जनता पार्टी ने पिछली बार नगर निगम की अनुमति के बगैर शहर में बैनर पोस्टर लगाए थे लेकिन पार्टी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि इसी तरह के काम पर कांग्रेस और एनएसयूआई से जुर्माना वसूला गया था। मंगलवार को पंजाब भाजपा के नवनियुक्त प्रधान विजय सांपला ने कार्यभार संभाला तो उनके स्वागत में सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय के पास वी-3 रोड समेत शहर में कई जगह झंडे, पोस्टर और बैनर लगा दिए गए थे। कल सुबह से ही नगर निगम को कई लोगों ने शिकायत की। लेकिन नगर निगम ने शाम को स्वागत सामग्री को तब जब्त किया जब कार्यक्रम समाप्त हो चुका था।

मीडिया में राजनीतिक दलों के प्रति अलग-अलग रुख को लेकर आलोचना के बाद  नगर निगम ने भाजपा के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बनाया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक निगम  ने पंजाब भाजपा को अभी कोई जुर्माने का नोटिस नहीं भेजा है। नोटिस भेजने का निर्णय सोमवार को कमिश्नर बी पुरुषार्था लेंगे। लेकिन ज्वाइंट कमिश्नर वीरेंद्र चौधरी ने ओएसडी अनुराग अग्रवाल को रिकवरी की डिटेल बनाने के लिए कह दिया है। 
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डेढ़ करोड़ तक लग सकता है जुर्माना
इसके बाद अतिक्रमण हटाओ दस्ते के इंस्पेक्टर सुनील दत्त ने ओएसडी अनुराग अग्रवाल को जब्त किए गए झंडों और होर्डिंग संबंधी रिपोर्ट भेज दी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर जुर्माने की राशि का आंकलन किया जा रहा है। विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक भाजपा पर जुर्माने की राशि एक से डेढ़ करोड़ रुपये के बीच बन सकती है।

मालूम हो कि पिछले साल मोदी के शहर में आगमन पर भी नगर निगम ने चंडीगढ़ भाजपा पर मेहरबानी दिखाई थी। झंडे और होर्डिंग नगर निगम की बगैर मंजूरी के लगाने पर 100 रुपये प्रति वर्ग फुट का प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
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तत्कालीन सलाहकार विजय देव के कार्यकाल में लगे थे आरोप

विजय देव, सलाहकार, चंडीगढ़ प्रशासक - फोटो : amar ujala
पिछले साल तत्कालीन सलाहकार विजय देव के कार्यकाल में आरोप लगा था कि कि नगर निगम के अधिकारियों ने शहर में विज्ञापन कंट्रोल एक्ट के तहत लगे बोर्ड लगने पर जुर्माना वसूलने की बजाय डिफाल्टर्स से सेटलमेंट करने पर ध्यान दिया, जबकि अधिकारियों के पास सिर्फ नोटिस भेजने का अधिकार था। नगर निगम की ओर से 10.48 करोड़ रुपये के जुर्माने के नोटिस भेजे गए, सिर्फ 1.26 लाख रुपये ही वसूलने में कामयाब रहा। ये नोटिस 10 हजार से लेकर 81 लाख रुपये के थे। 

विजिलेंस जांच की नहीं आई रिपोर्ट
जुर्माना राशि न लेने के मामले में सलाहकार विजय कुमार देव ने विजिलेंस जांच के भी आदेश दिए थ।े लेकिन जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इसके साथ ही वित्त सचिव ने साल 2013 से 2015 के दौरान जितने भी सेटलमेंट करके मामले सुलझाने का दावा किया गया था । सलाहकार ने नगर निगम से उसकी आडिट रिपोर्ट मांगी थी लेकिन निगम ने अभी तक आडिट रिपोर्ट प्रशासन को नहीं भेजी है।


नगर निगम की हालत जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली है। जब कांग्रेस का मेयर था तो शहर में पार्टी का कोई समारोह होने पर उसके बैनर, झंडे और होर्डिंग लगाए जाते थे। अब चूंकि भाजपा का मेयर है तो वह भी वैसा ही कर रही है। नगर निगम कार्रवाई सिर्फ आम आदमी के खिलाफ करता है।
सुरेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर-15 
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