प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को प्रतीकात्मक फोटो
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शहर के प्राइवेट स्कूलों में निजी पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस से हटवाने के मामले में यूटी प्रशासन के अधिकारियों की बोलती एमएचआरडी के अधिकारियों के सामने बंद हो गई। बुधवार नई दिल्ली में एमएचआरडी और सीबीएसई अधिकारियों की सालाना बजट मीटिंग में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी प्राइवेट स्कूल और निजी पब्लिशर्स के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के मुद्दे पर मौन साधे रहे।
प्राइवेट स्कूलों, निजी पब्लिशर्स और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मंशा पर अब सवालिया निशान लग रहा है। अमर उजाला ने पहले ही कहा था कि प्रशासन के अधिकारी इस मामले को लेकर शुरू से ही बैकफुट पर हैं। लिखित और व्हाट्सअप पर शिक्षा सचिव और डीएसई को शिकायतें मिलने के बाद भी प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ सिर्फ जवाब तलबी के अलावा किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई ।
मंगलवार को दिल्ली गए शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारी प्राइवेट स्कूलों और निजी पब्लिशर्स की मिलीभगत के मामले को एमएचआरडी अधिकारियों के सामने उठाने की तैयारी करके गए थे। लेकिन मीटिंग मेें कोई भी अधिकारी निजी पब्लिशर्स के खिलाफ कुछ नहीं बोला।
जस्टिस मोंगिया बीमार, रिपोर्ट में हो सकती है देरी
प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें सिलेबस में लगवाने के खिलाफ अभिभावक खुलकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शिकायतें दे रहे हैं। उधर, शिक्षा विभाग इस मामले में 2013 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा प्राइवेट स्कूलों के फीस स्ट्रक्चर को लेकर गठित जस्टिस आरएस मोंगिया कमीशन की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। लेकिन जस्टिस मोगिंया की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश होने में अभी देर लग सकती है। जस्टिस मोंगिया फिलहाल तबीयत खराब होने के कारण नई दिल्ली में इलाज करा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में जस्टिस मोंगिया ने बताया कि वह अगले हफ्ते तक ही शहर में लौटेंगे।
अब मामला प्रशासक तक पहुंचेगा
कप्तान सिंह सोलंकी, गवर्नर
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद प्राइवेट स्कूल 4 से 5 हजार का बुक सेट खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जबकि एनसीईआरटी का सेट 300 रुपये तक आसानी से मिल जाता है। निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें सिलेबल से नहीं हटाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में कुछ अभिभावकों ने एडवाइजर परिमल राय और प्रशासक प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी तक शिकायत भेजनी शुरू कर दी है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मामले को हल्के में लेने पर गाज गिर सकती है। सूत्रों के अनुसार अगले हफ्ते पूरे मामले को लेकर प्रशासन के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।
इस साल देरी, अगले के लिए करनी होगी तैयारी
निजी स्कूलों में एकेडमिक सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा निजी पब्लिशर्स की किताबों के मामले में कोई एक्शन लेने से खास लाभ नहीं मिलने वाला। लेकिन अभिभावक अभी से अगले सत्र में प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने को लेकर शिक्षा विभाग पर दबाव बनाना चाहते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) विनय आर सूद अगले हफ्ते सभी प्राइवेट स्कूलों से इस संबंध में जवाब तलब करेंगी।
एसएसए के लिए मांगे 70 करोड़, मिले 65 करोड़
नई दिल्ली में एमएचआरडी मिनिस्ट्री में सर्व शिक्षा अभियान(एसएसए) बजट को लेकर बुधवार मीटिंग हुई। चंडीगढ़ को एसएसए बजट के तहत 65 करोड़ का बजट मंजूर हुआ है। अधिकारियों के अनुसार बजट में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। पिछले साल यूटी को सिर्फ 59 करोड़ बजट में मिले थे। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार से इस बार 70 करोड़ का प्रस्तावित बजट मांगा था। लेकिन मीटिंग में अधिकारी सिर्फ 65 करोड़ पर ही मुहर लगवा सके।
मीटिंग में सिर्फ एसएसए बजट के बारे में ही डिस्कशन हो सका। प्राइवेट पब्लिशर्स मामले को उठाने के लिए यह राइट फोरम नहीं था। प्रशासन इस मामले में अब अपने स्तर पर ही कार्रवाई करेगा। अगले हफ्ते मामले पर मीटिंग कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सर्वजीत सिंह, शिक्षा सचिव चंडीगढ़
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प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को हटाने के मामले में मीटिंग में डिस्कशन नहीं हो सका। मामले से जुड़ा कोई संबंधित अधिकारी भी नहीं था। शिक्षा सचिव से इस मामले में चंडीगढ़ लौटने पर विस्तार से चर्चा होगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी ।
रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ,डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़