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पंजाब भाजपा में कलह: किसान आंदोलन पर बढ़ रही गुटबाजी, पार्टी के खिलाफ बोलने वाले पूर्व मंत्री अनिल जोशी निष्कासित

Sat, 10 Jul 2021 08:08 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब की राजनीति के जानकार भाजपा में इस अंदरूनी कलह की वजह किसान आंदोलन को बता रहे हैं। उनका कहना है कि किसान आंदोलन के बाद पार्टी पर आए संकट ने नेताओं के बीच की दरार और गहरी हो गई है।
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अनिल जोशी भाजपा से निष्कासित। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का दम भरने वाली पंजाब भाजपा में भी कांग्रेस की तरह अंतर्कलह शुरू हो गई है। इन दिनों पूरी पार्टी पांच गुटों में नजर आ रही है। कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के पक्ष में बयान देने वाले नेता अब खुलकर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। 

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किसानों के समर्थन में बयानबाजी करने पर पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की संस्तुति पर प्रदेश महासचिव डा. सुभाष शर्मा ने यह कार्रवाई की है। प्रदेश भाजपा की ओर से इसी सप्ताह जोशी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।


प्रदेश महासचिव सुभाष शर्मा ने शनिवार को बताया कि पूर्व मंत्री अनिल जोशी द्वारा केंद्र सरकार, पार्टी के केंद्रीय नेताओं तथा पार्टी की नीतियों के विरुद्ध बयानबाजी की जा रही थी, जो कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में आता है। इसलिए प्रदेश भाजपा द्वारा अनिल जोशी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिस पर जोशी को दो दिन के अंदर अपना जवाब देने को कहा गया था। लेकिन अनिल जोशी ने पार्टी के विरुद्ध चलने का अपना रवैया नहीं छोड़ा, जिस पर जोशी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है।  
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किसानों के मुद्दे पर बढ़ रही रार

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी और मास्टर मोहन लाल लगातार किसानों के मुद्दों पर प्रदेश नेतृत्व पर आरोप लगा रहे हैं। दोनों नेता कह रहे हैं कि पंजाब भाजपा के पदाधिकारियों ने केंद्रीय नेतृत्व को किसान आंदोलन के सही तथ्यों के बारे में नहीं बताया। जिसके कारण आज राज्य में भाजपा पदाधिकारियों को किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। 

पार्टी में हालात ऐसे हो गए हैं कि एक ही मुद्दे पर पार्टी के नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं। जिसके कारण अब पार्टी कई गुटों में नजर आने लगी है। सियासी जानकार इसकी वजह किसान आंदोलन को बता रहे हैं। उनका कहना है कि किसान आंदोलन के बाद पार्टी पर आए संकट ने नेताओं के बीच की दरार और गहरी हो गई है।

ये नेता छोड़ गए पार्टी
किसान आंदोलन के बाद पार्टी में शुरू हुई अंतर्कलह के कारण कई नेता भाजपा को अलविदा कह गए हैं। पिछले साल गो सेवा आयोग का नेतृत्व करने वाले अनुसूचित समाज के नेता कीमती भगत पार्टी छोड़कर अकाली दल में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा भाजपा महासचिव मलविंदर सिंह कंग भी इस्तीफा दे चुके हैं। हाल ही में उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली है। पार्टी सूत्रों के अनुसार चुनाव से पहले कई और बड़े चेहरे दूसरे दलों की ओर रुख करेंगे। 

पार्टी में किसी तरह की कोई अंतर्कलह नहीं है। भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। चुनाव की नजदीकियों को देखते हुए संगठन की कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कार्यकर्ताओं से केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश स्तर के नेता रूबरू हो रहे हैं। जल्द ही नाराज नेताओं को भी सुना जाएगा। - दुष्यंत गौतम, प्रभारी पंजाब, भाजपा

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