पंजाब विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान नवजोत सिद्धू के तीखे तेवरों के कारण अकाली विधायक एक बार फिर भड़क उठे। उन्होंने सिद्धू पर अपशब्द, जातिसूचक शब्द बोलने और गलत शब्दावली का प्रयोग करने का आरोप लगाया। नारेबाजी के बाद अकालियों ने प्रश्नकाल खत्म होने से कुछ समय पहले वाकआउट कर दिया।
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प्रश्नकाल के बाद सुखबीर बादल ने कमान संभाली तो मनप्रीत बादल भी सिद्धू के बचाव में आ गए। अकालियों ने वेल में जाकर नारेबाजी शुरू कर दी। आखिर कार्यवाही तीस मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में दो बार और कार्यवाही स्थगित की गई।
पूरे सत्र के दौरान सिद्धू, अकालियों पर तीखे हमले करते रहे हैं, वहीं सिद्धू भी अकालियों के टारगेट पर रहे हैं। प्रश्नकाल के दौरान भी जिन सवालों के सिद्धू ने जवाब दिए, उनमें दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई है। बुधवार को भी प्रश्नकाल के दौरान शिअद के पवन टीनू ने अपने हलके आदमपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के काम की प्रगति के बारे में पूछा। सिद्धू ने विस्तार से पूरा जवाब पढ़ कर सुनाया। उसके बाद अपने अंदाज में बोलना शुरू किया कि पिछली सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल में 64 एसटीपी बने थे, जिन पर 1300 करोड़ की लागत आई थी ताकि पानी ट्रीट करके खेतों में दिया जा सके, इंडस्ट्री को मिल सके, या फिर पौधों को दिया जा सके। लेकिन उनमें से एक भी एसटीपी नहीं चलता है। सिर्फ दो प्रतिशत पानी ही किसानों को सिंचाई के लिए दिया जा रहा है।
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अकालियों के हंगामे में नहीं शामिल हुई आप
सिद्धू के तीखे तेवरों पर भड़के अकाली
इस पर अकालियों ने विरोध किया तो सिद्धू बोले मैं जवाब दे रहा हूं, टिका के दूंगा। अकालियों ने खड़े होकर हंगामा शुरू कर दिया। सिद्धू के तेवर और हमलावर हो गए। वह बोले कि मैं सारे चला के दूंगा पर तुम्हारे लिए नहीं, पंजाब के लिए।
टीनू ने कहा कि पंजाब में कई एसटीपी चल रहे हैं। जो नहीं चल रहे, उनकी जांच कराएं, दोषियों पर कार्रवाई करें। सिद्धू ने कहा कि उन्होंने छह एसटीपी का मुआयना किया था, डेराबाबा नानक के एसडीओ को सस्पेंड कर दिया था। डेढ़ साल में पुराने सभी एसटीपी चलाकर देंगे। तभी टीनू समेत सारे अकालियों ने विरोध शुरू कर दिया। नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। टीनू का आरोप था कि सिद्धू ने उन्हें अपशब्द कहे हैं। इस बात को लेकर अकाली नारेबाजी करते रहे।
स्पीकर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह जांच कराएंगे, अगर गाली दी होगी तो सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अकाली नहीं माने और प्रश्नकाल खत्म होने से कुछ देर पहले उन्होंने वाकआउट कर दिया। प्रश्नकाल खत्म होते ही सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया सदन में आ गए। सुखबीर ने कहा कि सदन की मर्यादा है, विपक्ष का सम्मान होना चाहिए। यह मंत्री के बर्ताव का तरीका नहीं है। अगर विपक्ष का मान नहीं तो हमें यहां आने की जरूरत क्या है, हम सरकार से सड़कों पर ही लड़ लेंगे। नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका ने भी सिद्धू पर हमला बोला।
मनप्रीत बादल ने बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष को पूरा सम्मान मिलेगा। आलोचना का स्वागत है, पर चेयर की तौहीन नहीं होनी चाहिए। सुखबीर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विपक्ष ने स्पीकर का खूब अपमान किया, हम तो शांति से बात कर रहे हैं। अब अकाली और कांग्रेस विधायक खड़े हो गए, नोंक-झोंक के बाद अकाली नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए।
बादल की तीर्थयात्रा स्कीम पर कांग्रेस ने लगाई ब्रेक
सिद्धू के तीखे तेवरों पर भड़के अकाली
बलबीर सिद्धू ने किया व्यंग्य, फूलका ने नवजोत सिद्धू पर बोला हमला
प्रश्नकाल की शुरुआत में ही आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कर्ज माफी पर बोलने की इजाजत मांगी, लेकिन स्पीकर ने इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने नारेबाजी करते हुए वाकआउट कर दिया। जब वह जा रहे थे तो बलबीर सिद्धू अपना सवाल पूछ रहे थे। सिद्धू ने व्यंग्यात्मक लहजे में आप विधायकों से कहा कि अब वे लौटकर न आएं। लेकिन नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका को लगा कि कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने यह टिप्पणी की है। बाद में फूलका ने सदन में इस बात लेकर सिद्धू पर तीखा हमला भी बोला।
बादल की तीर्थयात्रा स्कीम पर कांग्रेस ने लगाई ब्रेक
पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल की ओर से पिछले साल शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा स्कीम पर कांग्रेस सरकार ने ब्रेक लगा दिया है। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने प्रश्नकाल के दौरान परमिंदर सिंह पिंकी के सवाल पर यह स्पष्ट किया कि अब यह स्कीम जारी नहीं की जाएगी। पिंकी ने तीर्थयात्रा स्कीम पर आए खर्च का ब्यौरा पूछा था। जिस पर मनप्रीत ने बताया कि इस पर 139 करोड़ से ज्यादा का खर्च आया।
पीआरटीसी और पंजाब रोडवेज का भी बकाया था, जिससे इस बजट में कवर किया गया। मनप्रीत ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी, बाबा फरीद यूनिवर्सिटी, सैनिक स्कूल में ग्रांट के कारण काम रुक गया था, उन्हें ग्रांट नहीं दी गई। कहीं ज्यादा पैसा सरकार ने तीर्थयात्रा स्कीम पर खर्च कर दिया। मदनलाल जलालपुर ने मुद्दा उठाया कि ग्रामीण इलाकों में रिहायश भत्ता कम होने के कारण अध्यापक वहां नहीं जाते, इसे समान किया जाए। दर्शन लाल और कंवर संधू ने कंडी एरिया में खेतों के किनारे बाड़ न होने के कारण फसल खराब होने का मुद्दा उठाया। मनप्रीत ने आश्वासन दिया कि पांच सालों के दौरान पूरी कंडी बेल्ट में बाड़ लगा दी जाएगी।