बादल सरकार के खिलाफ पंजाब के लोगों में जिस गुस्से की शुरुआत 2014 के लोकसभा चुनाव में हुई थी, वह 2017 में अपने अंजाम पर पहुंच गई। जब पूरे देश में मोदी लहर थी तब पंजाब के लोगों ने कद्दावर भाजपाई अरुण जेटली के मुकाबले कैप्टन अमरिंदर सिंह को जीत दिलाकर बादल सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई थी।
इसके अलावा बादलों के लिए दूसरा सैटबैक था मालवा में आम आदमी पार्टी की बंपर जीत। कारण कई थे, लेकिन लोगों की नाराजगी की ये एक बानगी थी जो 2017 में पूरी पिक्चर केतौर पर सामने आ गई। आम आदमी पार्टी को हालांकि वह जीत नहीं मिली जिसकी उम्मीद उन्हें थी, लेकिन पार्टी ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज जरूर करवा दी। वहीं कांग्रेस इस बार कैप्टन के करिश्माई व्यक्तित्व और एंटी इनकंबेसी लहर में जीत दर्ज कर पाई।
बड़े बादल इस बार भी अपनी सीट बचाने में तो कामयाब रहे लेकिन 10 साल की सरकार को नहीं बचा पाए। आप और कांग्रेस के हालात एक से हैं। आप को अपने केंद्रीय नेतृत्व की वजह से वोट हासिल हुए वहीं कांग्रेस अपने स्थानीय नेतृत्व की लहर पर सवार होकर कुर्सी तक जा पहुंची।