चंडीगढ़ में डड्डूमाजरा गारबेज ट्रीटमेंट प्लांट में लगे कूड़े के ढेर से 50 हजार से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की बात कहते हुए इससे निजात की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम से जवाब तलब किया है। नगर निगम को 22 अप्रैल तक जवाब दाखिल करना होगा।
याचिका दाखिल करते हुए अमित शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि 2005 में जेपी ग्रुप को गारबेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 10 एकड़ भूमि दी गई थी, जिस पर 2008 में काम शुरू हुआ था। 2016 में टिपिंग चार्ज की जेपी ने मांग की और विवाद बढ़ता गया। 2020 में नगर निगम ने कचरा प्रबंधन का जिम्मा खुद उठाया और कार्य आरंभ किया। गत वर्ष निगम केवल 13.36 प्रतिशत कचरे का निपटारा कर सका, वहीं इस वर्ष मई तक 16.09 प्रतिशत का निपटारा हुआ। याची ने बताया कि 2016 से 2020 के बीच कचरा जमा करने में 86 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं इसके निपटारे में केवल 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके चलते बिना निपटारा हुआ कचरा 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है और कचरे के पहाड़ का कद बढ़ता जा रहा है।
यहां से होने वाली बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो गया है और यहां पर 2005 से 2021 तक आग लगने से जुड़ी 486 कॉल की गई हैं। इसी वर्ष मार्च में लगी आग एक हफ्ते तक बुझाई नहीं जा सकी थी। याची ने कहा कि अधिकारी कचरा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों खर्च कर विदेश यात्रा करके आते हैं और इसका शून्य नतीजा कचरे का पहाड़ साबित करता है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि लोगों को स्वच्छ वायु, स्वास्थ्य वातावरण मिलना सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए। साथ ही कचरे का प्रबंधन करने में विफल रहने के मामले में नगर निगम के खिलाफ जांच की जाए।