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हाईकोर्ट का आदेश, यूजीसी तत्काल जारी करे पीयू को 21 करोड़

Thu, 16 Mar 2017 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Court On PU - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूजीसी को आदेश दिए हैं कि वह 21 करोड़ की ग्रांट पीयू को जारी करे। अदालत ने पंजाब यूनिवर्सिटी की खराब वित्तीय व्यवस्था के चलते यह फरमान जारी किया है। हाईकोर्ट ने पीयू को सारे खर्चों का ब्यौरा तथा अगले वित्तीय वर्ष के लिए एस्टीमेट तैयार कर यूजीसी को सौंपने के आदेश दिए हैं। यूजीसी को अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को बताना होगा कि इन एस्टीमेट पर उनका क्या स्टैंड है। मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।
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बुधवार को पीयू की ओर से सीनियर एडवोकेट गिरीश अग्निहोत्री ने हाईकोर्ट से अपील की कि पीयू को यूजीसी की ओर से जारी की जाने वाली 176 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की ग्रांट को बढ़ाया जाए। पीयू का खर्च काफी बढ़ गया है और ग्रांट की कमी के चलते यूनिवर्सिटी को करोड़ों रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में कुल वित्तीय घाटा 277 करोड़ 72 लाख रुपये हो चुका है। ऐसे में यूजीसी यदि पीयू को इस वर्ष की ग्रांट की 176 करोड़ रुपये की राशि पूरी भी जारी कर देती है तब भी यूनिवर्सिटी का इस वर्ष का घाटा 101 करोड़ रुपये से भी अधिक होगा। 

हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार पीयू ने परीक्षा शुल्क से जुटाए 20 करोड़ रुपये से किसी तरह फरवरी माह का वेतन जारी किया है। यूजीसी की ग्रांट के अभाव में मार्च का वेतन जारी नहीं किया जा सकेगा। ग्रांट के 21 .78 करोड़ यूजीसी जारी करता है तो मार्च का वेतन दिया जा सकता है। फिर अप्रैल माह के वेतन का सवाल खड़ा हो जाएगा। हाईकोर्ट को बताया गया कि यूजीसी के निर्देशों के अनुसार पीयू ने अपने बजट का संशोधित अनुमान भी भेज दिया है। हाईकोर्ट ने इस पर यूजीसी को निर्देश दिए हैं कि अब अगले वित्तीय वर्ष से पीयू की ग्रांट बढ़ाये जाने के लिए जो संशोधित अनुमान भेजा गया है, उस पर यूजीसी चार सप्ताह में कार्यवाही कर हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दें।
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सांसद के दावे की यूजीसी को जानकारी नहीं

कोर्ट - फोटो : Demo Pic
सांसद के दावे की यूजीसी को जानकारी नहीं
पीयू के कुलपति अरुण ग्रोवर ने हाईकोर्ट को बताया कि यूजीसी ने 140 करोड़ रुपये की वह ग्रांट जारी नहीं की है, जिसके लिए स्थानीय सांसद किरण खेर ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बात की थी। केंद्रीय मंत्री ने यूजीसी को तत्काल एमरजेंसी ग्रांट के तौर पर 140 करोड़ जारी करने के आदेश दिए थे। यूजीसी ने हाईकोर्ट को बताया कि यह 140 करोड़ रुपये जारी करने के बारे में अभी तक यूजीसी को मानव संसाधन मंत्रालय से कोई निर्देश ही नहीं दिए गए हैं। उन्हें स्थानीय सांसद किरण खेर और मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के बीच हुई इस बात की कोई भी जानकारी नहीं है। फिलहाल पीयू को इस वित्तीय वर्ष की 21.78 करोड़ की लंबित ग्रांट जारी करने से जुड़े  निर्देश ही पत्र के माध्यम से मंत्रालय से प्राप्त हुए हैं। हाईकोर्ट ने यूजीसी को हर हाल में 31 मार्च से पहले यह ग्रांट जारी करने के निर्देश हैं।

पीयू, चंडीगढ़ और एसवाईएल पर है विवाद
हाईकोर्ट ने कहा है कि पीयू को क्यों नहीं सेंट्रल यूनिवर्सिटी बना दिया जाता। इससे यूनिवर्सिटी के सभी वित्तीय संकट खत्म हो जाएंगे। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने इस पर कहा कि पीयू भी ठीक उसी तरह ही राज्यों और केंद्र के बीच विवाद का विषय है, जिस तरह एसवाईएल और चंडीगढ़ है। पीयू पर पंजाब अपना हक छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन ग्रांट की राशि 20 करोड़ से अधिक बढ़ाने को तैयार नहीं है। वीसी ने बताया कि पीयू के अधीन 192 कॉलेज हैं, जिनमें से महज 20 कॉलेज चंडीगढ़ में हैं। जबकि शेष 172 कॉलेज पंजाब में हैं। ऐसे में पंजाब सरकार को पीयू की ग्रांट बढ़ानी चाहिए।

पंजाब ने दी खराब वित्तीय हालत की दुहाई
पंजाब सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में बताया कि राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए पंजाब की ओर से पीयू को 20 करोड़ से अधिक की ग्रांट जारी नहीं की जा सकती। अगर केंद्र चाहे तो इससे अधिक की ग्रांट पीयू को जारी कर दे। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह वार्षिक ग्रांट को बढ़ाये जाने के आवेदन पर गौर करें और अगली सुनवाई पर इसकी जानकारी दें।  
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