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कानून तोड़ने वालों को बख्शना नहीं, सख्ती करनी पड़े तो पीछे नहीं हटना: हाईकोर्ट

Fri, 25 Aug 2017 01:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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court - फोटो : Demo Pic
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साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख पर आने वाले सीबीआई कोर्ट के फैसले से पहले पंचकूला में एकत्रित हुई समर्थकों की भीड़ से गंभीर बने हालात को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा न जाए, सख्ती करनी पड़े तो भी पीछे न हटें।
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जहां मैजिस्ट्रेट पावर इस्तेमाल करने की जरूरत हो वहां इसमें देरी न हो। साथ ही पुलिस कमिश्नर द्वारा पैदल लोगों को रोकने को असंभव बताने पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिसिंग नहीं आती तो दिल्ली पुलिस से सीख लो, दिल्ली पुलिस साल में कई बार ऐसी परिस्थितियों से निपटती है और सफल भी रहती है।

मामला सुनवाई के लिए पीआईएल बेंच के पास पहुंचा था, जिसने मामले की गंभीरता को देखते हुए फुल बेंच गठित कर इसे सुनने का निर्णय लिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस एसएस सरों, जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस अवनीश झिंगान फुल बेंच में शामिल हुए। फुल बेंच ने सुनवाई करते हुए केंद्र से पूछा कि पंजाब चुनाव में 500 कंपनियां तैनात की गई थीं तो अब केवल 75 कंपनियां ही क्यों? केंद्र सरकार ने कहा कि उपलब्धता के आधार पर यह मुहैया करवाई गई हैं। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि नागरिकों की सुरक्षा हो ऐसे में जितना बल मांगा जाए उपलब्ध हो। जिस प्रकार लोग एकत्रित हो रहे हैं, उससे किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
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सरकार की ओर से कोई कमी रही तो हालात बिगड़ सकते हैं। ऐसे में किसी भी कानून की उल्लंघना करने वाले को बख्शा न जाए। केवल पंचकूला में ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा और विशेष तौर पर सिरसा में इस बात का खास ख्याल रखा जाए। इसलिए आज ही रिजर्व फोर्स भेजी जाए। आर्मी को स्टैंडबाय रखा जाए और जरूरत पड़ते ही इसको व्यवस्था के लिए उतार दिया जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हरियाणा ही नहीं पंजाब और चंडीगढ़ को भी यदि आर्मी की जरूरत पड़े तो तुरंत उन्हें मुहैया करवाई जाए। इसके साथ ही सीबीआई कोर्ट में पेश हुए गवाहों, जांच अधिकारी और सरकारी वकील को मिल रही धमकियों पर राज्य सरकार को यह आदेश दिए कि वे इन सभी की सुरक्षा को सुनिश्चित करें।
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डेरा सच्चा सौदा रामपाल की तरह कोर्ट को दे रहा चुनौती

Ram Rahim Rape case verdict
पुलिस कमिश्नर से पूछा-क्या आपके पास कोई योजना नहीं थी
हाईकोर्ट पंचकूला पुलिस कमिश्नर पर भी सख्ती बरतता नजर आया। कोर्ट ने पूछा कि क्या आपने भीड़ को आने से रोकने के लिए कोई प्लान नहीं बनाया। क्या आपके पास कोई योजना नहीं है आखिर क्यों धारा 144 का मजाक उड़ाया गया। कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया कि वह इस मामले में सख्त कदम तत्काल उठाए, क्योंकि हरियाणा सरकार इस मामले में विफल नजर आ रही है।

डेरा सच्चा सौदा रामपाल की तरह कोर्ट को दे रहा चुनौती
हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि डेरा सच्चा सौदा रामपाल की तरह कोर्ट को चुनौती दे रहा है। गुप्ता ने कहा कि सबको लगता है कि लाखों लोगों की भीड़ पर गोली नहीं चलाई जा सकती है। बाबरी मस्जिद मामले में तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने भी कहा था कि भीड़ पर गोली नही चलाई जा सकती। इसका नतीजा यह हुआ कि भीड़ का उत्साह बढ़ा और वह कई गुना ज्यादा बढ़ गई। ऐसे में एक उदाहरण पेश करना जरूरी हो गया है।

डेरा वकील ने कहा-याचिका राजनीतिक
डेरे के वकील ने जनहित याचिका पर ही सवाल उठा दिए। डेरे की ओर से कहा गया कि यह जनहित याचिका राजनीतिक है। याचिकाकर्ता इनेलो का कार्यकर्ता है। याचिका डेरे को बदनाम करने की साजिश है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हमें राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। हमें केवल लोगों की सुरक्षा से मतलब है और लोगों के जमा होने से नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है जो होने नहीं दिया जाएगा।
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कुछ हुआ तो सरकार होगी जिम्मेदार

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हरियाणा और पंचकूला क्या भारत का हिस्सा नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा में फोर्स देते हुए आनाकानी हो रही है। यदि पंचकूला और हरियाणा को भारत का हिस्सा नहीं मानते तो मना कर दो कि इसके लिए कोई और व्यवस्था कर लो। इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि उपलब्धता के आधार पर मुहैया करवाया गया है।

कुछ हुआ तो सरकार होगी जिम्मेदार
कोर्ट ने कहा कि पंचकूला में इस प्रकार लोगों का जमावड़ा लगने से गरीब लोगों के लिए तो रोटी के लाले पड़ गए हैं। गरीब लोगों को भी जीने का अधिकार है और इसकी रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। क्यों नहीं समय पर पंचकूला में एंट्री बंद की गई। यदि ऐसा किया गया होता तो हालात इस कदर तक बदतर नहीं होते। लोगों को कोर्ट की शरण नहीं लेनी पड़ती। इस पूरी स्थिति को हल्के में लिया गया इसी का नतीजा है कि अब स्थिति काबू के बाहर है।
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