राजनैतिक दलों व अन्य प्रदर्शनकारियों द्वारा नेशनल और स्टेट हाईवेज सहित अन्य जगहों पर की जा रही रैलियों और धरने प्रदर्शनों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि धरना- प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है। इससे रोकेंगे नहीं, लेकिन यदि इससे आम आदमी परेशान हुआ तो दोषियों को बख्शेंगे भी नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि भविष्य में प्रदर्शनों को किस तरह से नियोजित किया जाए, जिससे आम आदमी को परेशानी न हो। इसके लिए हाईकोर्ट ने वकीलों से सुझाव मांगे हैं जिसको आधार बनाकर आदेश जारी करेगा। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा, अकाली दल की ओर से पेश हुए एडवोकेट हरप्रीत सिंह बराड़, सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली, आरएस बैंस बैठक कर सुझाव देंगे।
बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही हाईकोर्ट ने कहा कि रिहाइशी इलाकों और नेशनल और स्टेट हाईवेज और अन्य सड़कों को धरने के नाम पर रोके जाने को हाईकोर्ट बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है तो इस अधिकार के चलते सामान्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। देखने में आया है कि जब धरने लगा सड़कें रोक दी जाती हैं तो कई बार एंबुलेंस तक को भी जाने नहीं दिया जाता है और तोड़फोड़ भी कर दी जाती है। अब इसके लिए दिशा-निर्देश तय किए जाने बेहद जरूरी हैं।