इसके बाद हाईकोर्ट ने लेदर इंडस्ट्री से निकलने वाले दूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए चल रहे कॉमन एफल्युएंट ट्रीटमेंट प्लांट को सरकार को अंतरिम तौर पर एक कमेटी गठित कर चलाने के आदेश दिए थे।
कमेटी को चेयर करने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने जालंधर के डीसी को सौंपी थी। हाईकोर्ट ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चीफ इंजीनियर को इस प्लांट की समय-समय पर जांच के आदेश दिए थे। पिछली सुनवाई पर भी हाईकोर्ट ने इस प्लांट की रिपोर्ट मांगी थी।
अब हाईकोर्ट को बताया गया कि लेदर इंडस्ट्री से निकलने वाले दूषित पानी का ट्रीटमेंट तय मानकों के तहत नहीं किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेशों के तहत डीसी की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की थी, उसे पांच वर्ष हो चुके हैं।
ऐसे में अब इसका काम सोसाइटी के हवाले किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों में बहस के बाद हाईकोर्ट ने यहां की सभी लेदर इंडस्ट्री को बंद करने के आदेश दिए और कहा कि जब तक तय मानकों के तहत यहां के दूषित पानी का ट्रीटमेंट नहीं होता तब ये बंद रहेंगी।