कोर्ट ने आदेश में कहा कि सरकार ने पदों के गुणांक में आवेदकों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना है। ऐसे में यदि बाद में दस्तावेजों की जांच की जाती है और कोई आवेदक अयोग्य पाया जाता है तो मेरिट से बाहर होने वाले उस आवेदक के साथ अन्याय होगा, जिसे अयोग्य आवेदक के कारण परीक्षा देने का मौका नहीं मिल सका। ऐसे में पहले दस्तावेजों की जांच की जाए और पात्र आवेदकों को ही अंक मिले हैं, यह सुनिश्चित करने के बाद मेरिट सूची तैयार की जाए (साथ ही यह भी कहा कि कर्मचारी चयन आयोग ने कॉमन मेरिट सूची तैयार की है जबकि यह सूची श्रेणी के अनुसार तैयार की जानी चाहिए थी, ताकि आवेदक को पता चल सके कि उस श्रेणी में उसका मुकाबला किससे है।
रात तक सरकार करती रही इंतजार
परीक्षा रद्द करने के आदेश के चलते सरकार व आयोग रात तक आदेश की प्रति की प्रतीक्षा करते रहे ताकि इसके खिलाफ अपील दाखिल की जा सके और शुक्रवार रात को ही सुनवाई हो जाए।
सरकार ने यह बनाया आधार
सरकार ने दलील दी कि परीक्षा के लिए रोल नंबर जारी किए जा चुके हैं और इसके लिए दूरदराज के क्षेत्रों से भी परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर पहुंचना था। ऐसे में ज्यादातर परीक्षार्थी शुक्रवार को ही इन केंद्रों के लिए निकल चुके हैं। परीक्षा को रद्द करना सही नहीं है और एकल बेंच के आदेश को खारिज किया जाए।
टाइम लाइन
- दोपहर 12:00 बजे हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग की योग्यता सूची को रद्द किया और सरकार को नई योग्यता सूची के आधार पर सीईटी करने का आदेश दिया।
- शाम 5:00 बजे सरकार ने एकल बेंच के आदेश को चुनौती देने के लिए डिविजन बैंक में अपील दायर करने का निर्णय लिया।
- शाम 6:00 बजे से रात 10:30 बजे तक सरकार एकल बेंच के आदेश के इंतजार की कॉपी का इंतजार किया।
- रात 10:30 बजे एकल बेंच के आदेश की कॉपी आने के बाद सरकार ने डिविजन बेंच में अपील दायर कर सुनवाई का आग्रह किया।