अगर इस्तीफे के साथ तीन माह का नोटिस नहीं दिया गया है तो फैकल्टी को इसकी एवज में सरकार को तीन माह के वेतन के बराबर राशि देनी होगी। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज के शिक्षक की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
मेडिकल कॉलेज के दो शिक्षकों ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि उन्होंने कॉलेज में 2017 में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति ली थी। इसके बाद उनका चयन किसी और मेडिकल कॉलेज में हो गया और उन्होंने वर्तमान कॉलेज से इस्तीफा दे दिया। जब सरकार को यह इस्तीफा दिया गया तो सरकार ने अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने से पहले तीन माह का वेतन जमा करवाने को कहा।
याची ने कहा कि उनके नियुक्ति पत्र में ऐसी कोई शर्त नहीं थी और ऐसे में उन्हें इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हरियाणा सरकार ने 19 फरवरी, 2018 के निर्देश के बारे में कोर्ट को बताया कि इसके अनुसार तीन माह का नोटिस अनिवार्य किया गया है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हरियाणा सरकार द्वारा जारी निर्देश को याचिकाकर्ताओं के लिए बाध्य माना। हाईकोर्ट ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय है और सरकार द्वारा उनसे तीन माह के वेतन की मांग को नाजायज नहीं माना जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।