ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट शक्ति विहीन नहीं है। ट्रायल कोर्ट को पेश न होने वाले गवाह के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है जबकि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने बेबसी दिखाई। हाईकोर्ट ने गवाही बंद करने का आदेश रद्द करते हुए एसएसपी को एएसआई को हिरासत में लेकर गवाही के लिए पेश करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए फकीर चंद ने बताया कि उसने अपने ऊपर हुए हमले की एफआईआर दर्ज करवाई थी। इस एफआईआर पर ट्रायल के दौरान जांच अधिकारी एएसआई केवल सिंह को समन आदेश जारी किया गया। समन आदेश के बावजूद वह पेश नहीं हुए। इसके बाद उनके खिलाफ जमानती वारंट और फिर पेश न होने पर गैर जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बावजूद वह पेश नहीं हुए तो ट्रायल कोर्ट ने गवाहियां बंद कर दीं। गवाहियां बंद करने के आदेश को ही हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट शक्ति विहीन नहीं है। कोर्ट को अधिकार है कि वह सरकारी गवाह को बुलाना सुनिश्चित करे। इस मामले में कोर्ट ने बेबसी दिखाते हुए गवाहियां बंद कर दीं। ऐसा करना शिकायतकर्ता के साथ अन्याय है। शिकायतकर्ता को उस गलती की सजा मिली है जो कि उसने की ही नहीं।
हाईकोर्ट ने गवाहियां बंद करने का आदेश रद्द करते हुए अगली सुनवाई पर एएसआई की गवाही सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। साथ ही उसकी पेशी को सुनिश्चित करने के लिए तरनतारन के एसएसपी को एएसआई को हिरासत में लेकर गवाही के लिए पेश करने का आदेश दिया है।