राम रहीम की पत्नी हरजीत कौर ने याचिका में बताया था कि राम रहीम की मां नसीब कौर गंभीर रूप से बीमार हैं। पिछले दिनों उन्हें हार्ट अटैक आया था, बावजूद इसके वह अपना इलाज नहीं करवा रही हैं। राम रहीम ने इससे पहले हरियाणा सरकार को पैरोल के लिए मांग पत्र दिया था जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।
मंगलवार को जैसे ही केस की सुनवाई आरंभ हुई तो हाईकोर्ट ने पूछा कि राम रहीम की मां का बाहर क्यों इलाज करवाना चाह रहे हैं, जबकि डेरे के खुद के अस्पताल हैं। साथ ही जब पूरा परिवार मौजूद है तो अकेले राम रहीम के न होने से क्या फर्क पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और कोर्ट अपने अधिकार से पैरोल देते हैं और यह कैदी का अधिकार नहीं है।
साथ ही यह भी कहा कि जब राम रहीम खुद मौजूद है तो उसकी पत्नी कैसे पैरोल के लिए याचिका दाखिल कर सकती है। साथ ही यह भी कहा कि राम रहीम की मां की एंजियोग्राफी भी हो चुकी है, ऐसे में अब राम रहीम को पैरोल की जरूरत नहीं है। इतनी सख्ती के बाद याची ने याचिका वापस लेने की छूट मांगी जिस पर हाईकोर्ट ने याचिका को वापस लेने की छूट देते हुए याचिका को खारिज कर दी।