पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एफआईआर खारिज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि आजकल युवा वर्ग के लेखन का अंदाज कुछ अलग है, जिसे मध्यम श्रेणी की शिक्षा पाने वाले समझ नहीं पाते। हाईकोर्ट ने कहा कि स्ट्रेट शूटर का अर्थ यह नहीं कि गोली मार दूंगा, पुलिस भी इसको समझने में नाकाम रही। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है।
शैलभ मेंहदीरत्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि 7 मार्च 2019 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। शिकायत के अनुसार याचिकाकर्ता ने उसे धमकी दी थी। याची ने बताया कि उसने एक मैसेज भेजा था, जिसमें स्ट्रेट शूटर व बॉस टू बॉस शब्दों का इस्तेमाल किया था। याची को इस मामले में गिरफ्तारी कर लिया गया था जिसके बाद उसे नियमित जमानत दे दी गई।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि पुलिस ने भाषा व व्याकरण के कम ज्ञान के कारण इसे धमकी भरा संदेश मान लिया और एफआईआर दर्ज कर ली गई। हाईकोर्ट ने कहा कि स्ट्रेट शूटर का मतलब सही को सही कहना है न की गोली मार देना। बॉस टू बॉस का अर्थ आमने-सामने की बातचीत होता है न की किसी प्रकार का कटाक्ष।
हाईकोर्ट ने कहा कि शब्दों के कई बार एक से अधिक मतलब निकल जाते हैं और ऐसी स्थिति में लाभ आरोपी को मिलना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होगा तो लोकतंत्र में लोगों को बात कहने और भाव प्रकट करने की मिली हुई छूट सीमित हो जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा कि आजकल के युवाओं के बीच ऐसी शब्दावली का उपयोग बहुत सामान्य है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस संदेश के अतिरिक्त ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित होता हो कि शिकायतकर्ता को याची से खतरा है। ऐसे में हाईकोर्ट ने एफआईआर खारिज करने का आदेश दिया है।