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चंडीगढ़: इन ड्राइवर एप पर रोक की मांग, हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से 30 अगस्त तक मांगा जवाब

Thu, 26 May 2022 03:47 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एप में लोगों से उनकी निजी जानकारी ली जाती है और भारतीय कानून के आधीन न आने के चलते इस जानकारी को बेचा जा सकता है, जिससे लोगों की निजता के हनन का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही यहां पर ड्राइवरों के लाइसेंस के सत्यापन भी पूरी तरह से नहीं किया जाता।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ ट्राइसिटी में बिना पंजीकरण कैब सेवा देने वाले इन ड्राइवर एप पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 30 अगस्त तक जवाब सौंपने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी हरगोबिंद सिंह ने एडवोकेट प्रदीप शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि भारत में बिना पंजीकरण के इन ड्राइवर एप कैब सेवा उपलब्ध करवा रही है। ऐसा करने से देश को राजस्व का नुकसान हो रहा है क्योंकि पैसे सीधा ड्राइवर लेता है और इसलिए जीएसटी की वसूली भी नहीं हो पाती। यह कंपनी विदेशी है और भारत में पंजीकृत नहीं है। ऐसे में यह भारतीय कानून की जद से भी बाहर है। ट्राइसिटी में यह कैब सेवा जुलाई 2019 में आरंभ की गई थी और तब से यह जारी है। 

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एप में लोगों से उनकी निजी जानकारी ली जाती है और भारतीय कानून के आधीन न आने के चलते इस जानकारी को बेचा जा सकता है, जिससे लोगों की निजता के हनन का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही यहां पर ड्राइवरों के लाइसेंस के सत्यापन भी पूरी तरह से नहीं किया जाता जिससे ग्राहकों की सुरक्षा को खतरा बना रहता है। याची ने बताया कि भारतीय प्रावधान के तहत एप में पैनिक बटन अनिवार्य होता है जिसे खास तौर पर महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए रखा गया है। इस एप में इस तरह का पैनिक बटन भी नहीं है। एप को दुनिया के कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है और भारत में भी इस पर प्रतिबंध होना चाहिए।

एसटीए ने आरटीआई में बताया- इन ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं

शहर में इन-ड्राइवर, रैपिडो समेत कई कंपनियां गैर कानूनी तरीके से कैब चला रही हैं। यह जानकारी स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने आरटीआई के जवाब में दिया है। इन-ड्राइवर मोबाइल एप को लेकर एसटीए जन सूचना भी जारी कर चुका है और लोगों को सलाह दी है कि वह इनमें सफर न करें, क्योंकि वह सुरक्षित नहीं हैं। एसटी ने ने केंद्र सरकार को भी लिखा है कि वह इन-ड्राइवर मोबाइल एप को ही प्ले स्टोर से हटा दें। इसके साथ ही रैपिडो जैसी कंपनियां जो बाइक टैक्सी चला रही हैं वह भी गैर कानूनी हैं, क्योंकि उन्होंने एसटीए से लाइसेंस प्राप्त नहीं किया है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा- 66 (1) के तहत कैब कंपनियों को सेवा देने के लिए राज्य सरकार से परमिट होना जरूरी है। परमिट उसी वाहन को मिलता है, जिसका व्यावसायिक श्रेणी में आरटीओ में पंजीकरण हो।

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