पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली नगर निगम में वार्डबंदी प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब सरकार, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वार्डबंदी के खिलाफ गुरमुख सिंह सोहल सहित अन्य पूर्व पार्षदों ने दायर याचिका में नए सिरे से की जा रही वार्डबंदी को सरकार द्वारा राजनैतिक लाभ के लिए बताया।
याची ने बताया कि सरकार ने 30 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर वार्डबंदी के लिए बोर्ड का गठन किया था जोकि पूरी तरह से अवैध है। इस बोर्ड में न तो मेयर और ना ही डिप्टी मेयर को शामिल किया गया, यहां तक की इसमें किसी भी पार्षद तक को शामिल नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट को बताया गया कि बोर्ड में सरकार ने जिन दो सदस्यों का नामांकन किया है, उसमें एक सदस्य के खिलाफ वर्ष 2012 में आपराधिक केस दर्ज है और उसके खिलाफ सीबीआई द्वारा दिसंबर 2013 में चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है। साफ है कि बोर्ड में दागी सदस्यों को शामिल किया गया है और मेयर और डिप्टी मेयर या अन्य किसी भी पार्षद को शामिल ही नहीं किया गया।
बोर्ड में दोनों सदस्य राज्य की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के सदस्य हैं। बोर्ड में राज्य के अन्य किसी भी राजनीतिक दल को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। बोर्ड में जिन सदस्यों को शामिल किया गया है वह आने वाले चुनाव में भी शामिल होंगे। तय है कि अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए बोर्ड के सदस्य बनाये गए हैं।
हाईकोर्ट को बताया गया है कि मोहाली नगर निगम में 50 वार्ड हैं। मोहाली नगर निगम का दायरा न तो बढ़ा है और न ही घटा है। ऐसे में वार्ड की संख्या को लेकर अभी निर्णय जरूरी नहीं है। शहर की जनसंख्या में कितनी बढ़ोतरी हुई है, इसका कोई सर्वे तक मौजूद नहीं है, खासतौर पर जातिगत सर्वे।
वार्ड नंबर 11 के बारे में बताया गया है कि यह वार्ड फेज-4 का है जोकि यहां के निवासियों के लिए सुविधाजनक है लेकिन अब नई वार्डबंदी में इसके तीन वार्ड बनाने का प्रस्ताव है, जिससे कांग्रेस के उम्मीदवार को फायदा पहुंचाया जा सके। इसी तरह अन्य वार्डों की भी जानकारी दी गई है।