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Chandigarh: 28 सप्ताह का गर्भ गिराने की हाईकोर्ट ने दी अनुमति, बच्ची के हित में निर्णय की विशेषज्ञों को छूट

Thu, 11 Aug 2022 08:17 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने पीजीआई को आदेश दिया है कि वह याची की बेटी को भर्ती करे और गर्भ को गिराने की प्रक्रिया आरंभ करे। ऐसा करते हुए यदि उन्हें लगे कि याची की बेटी को खतरा है तो इस प्रक्रिया को रोक दिया जाए।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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14 साल की मासूम दुष्कर्म पीड़िता द्वारा अपनी मां के माध्यम से दाखिल गर्भपात की अनुमति से जुड़ी याचिका पर पीजीआई ने रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि 28 सप्ताह के गर्भ को गिराना बेहद जोखिम वाला है। हाईकोर्ट ने पीड़िता को पीजीआई में भर्ती करवाने का आदेश देते हुए विशेषज्ञों को पीड़िता का गर्भपात करने का आदेश दिया है। हालांकि मासूम के हित को देखते हुए विशेषज्ञों को निर्णय लेने की छूट दी है।

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पंचकूला निवासी नाबालिग ने अपनी मां के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए गर्भपात की अनुमति मांगी थी। याची की मां ने बताया कि उसकी बेटी के साथ पड़ोसी ने दुष्कर्म किया था। इसके बाद जब गर्भ के बारे में जानकारी मिली तो एफआईआर दर्ज करवाई गई। याची ने बताया कि वर्तमान में उसकी बेटी 28 सप्ताह की गर्भवती है। यदि उसकी बेटी ने बच्चे को जन्म दिया तो यह उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति को बिगाड़ देगा। याची ने कहा कि गर्भ 28 सप्ताह का होने के कारण हाईकोर्ट की अनुमति के बिना गर्भपात नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट याची को उसकी बेटी का गर्भपात करवाने की अनुमति दे।

याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 9 अगस्त को आदेश दिया था कि वह अपनी बेटी को लेकर बुधवार सुबह 10 बजे पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पास पहुंचे। उसके बाद पीजीआई मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता के गर्भ की जांच करे। इसकी रिपोर्ट दोपहर बाद हाईकोर्ट में पेश की जाए। 
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हाईकोर्ट में पीजीआई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि याची की बेटी स्वस्थ है और बच्चा भी स्वस्थ है। याची की बेटी में ऐसे लक्षण देखे गए हैं कि यदि गर्भ नहीं गिराया गया तो वह आत्महत्या कर सकती है। गर्भ 28 सप्ताह का है और ऐसे में यदि इसे गिराया गया तो यह जोखिम भरा होगा। हाईकोर्ट ने पीजीआई को आदेश दिया है कि वह याची की बेटी को भर्ती करे और गर्भ को गिराने की प्रक्रिया आरंभ करे। ऐसा करते हुए यदि उन्हें लगे कि याची की बेटी को खतरा है तो इस प्रक्रिया को रोक दिया जाए। यदि बच्चा जीवित रहता है तो उस स्थिति में पूरा रिकॉर्ड तैयार करे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।

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