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अहम फैसला: तलाक लेने पर छह माह साथ रहने की शर्त अनिवार्य नहीं, हाईकोर्ट ने कहा- दी जा सकती है छूट

Wed, 03 Jan 2024 10:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सहमति से तलाक लेने के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में छह महीना साथ रहने की अनिवार्य शर्त में छूट दी जा सकती है। हालांकि यह फैसला अदालत अपने विवेक पर लेगी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहमति से तलाक के मामले में अनिवार्य छह महीने साथ रहने की शर्त पर अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे मामलों में ट्रायल की तरह जांच जरूरी नहीं है। अदालत अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए इस अवधि को लेकर छूट दे सकती है।

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याचिका दाखिल करते हुए पटियाला के जोड़े ने हाईकोर्ट को बताया कि उनका विवाह 2018 में हुआ था और 2020 से वे अलग रह रहे हैं। दोनों के बीच रिश्ते को बचाने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में उन्होंने पटियाला की अदालत में तलाक के लिए केस दाखिल किया था। इस केस में दोनों ने 6 माह साथ रहने की अनिवार्य शर्त से छूट मांगी थी जिससे अदालत ने इन्कार कर दिया था। इसी आदेश को दोनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि सहमति से तलाक के मामलों में अगर अदालत इस बात से संतुष्ट है कि बिना किसी धोखे के अर्जी दाखिल की गई है तो कूलिंग ऑफ पीरियड को माफ किया जा सकता है। ऐसे मामलों में ट्रायल की तरह जांच की जरूरत नहीं होती है और यह पूरी तरह से अदालत के विवेक पर निर्भर करता है कि यह अवधि माफ की जानी चाहिए या नहीं। इस मामले में दोनों पढ़े-लिखे हैं और जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं। ऐसे में इस छह महीने की अवधि को माफ किया जाना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पटियाला की अदालत के फैसले को रद्द करते हुए तलाक को लेकर आगे सुनवाई कर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

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