एनडीपीएस के एक मामले में आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि नशे के सौदागरों पर किसी तरह की नरमी उन्हें बढ़ावा देगी। क्षेत्र में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है और यह युवाओं का जीवन बर्बाद कर रही है। जालंधर निवासी दीपक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए नियमित जमानत की मांग की थी।
याची ने बताया कि एफआईआर के अनुसार उससे नशे के 22 टीकों की बरामदगी हुई थी। इसके चलते 23 जुलाई, 2018 को एफआईआर दर्ज की गई थी। याची ने कहा कि वह लंबे समय से हिरासत में है और ऐसे में उसे जमानत दी जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत तब दी जाती है जब न्यायालय को लगे कि आरोपी के बेगुनाह होने की संभावना हो सकती है। इस मामले में न्यायालय को ऐसा कुछ नहीं लगता है और इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
साथ ही नशे के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी बहुत तेजी से बढ़ रही है। नशा बड़ी तेजी से युवाओं के जीवन को बर्बाद कर रहा है। कुछ पैसों के लिए नशे के सौदागर युवाओं को मौत के मुंह तक लेकर चले जाते हैं। नशे ने समाज के ताने-बाने को बिगाड़ कर रख दिया है। नशे के सौदागरों को किसी भी तरह से बख्शना उन्हें बढ़ावा देने के बराबर होगा। ऐसे में उनसे किसी भी तरह की न्यायालय को सहानुभूति नहीं है।