90 साल की महिला से दुष्कर्म के आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने पीड़ित महिला के बेटे के बयान पर शंका के बाद यह आदेश जारी किए हैं। याचिका दाखिल करते हुए आरोपी ने बताया था कि वृद्ध महिला से दुष्कर्म के आरोप में उसे होशियारपुर की ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में वह निर्दोष है। उसकी सजा को खारिज किया जाए।
पीड़ित महिला के बेटे के बयान के मुताबिक उसकी मां रोजाना की तरह 11 अप्रैल 2013 को भी दिन में दो बजे मंदिर के लिए निकली। जब शाम 6 बजे तक वह नहीं लौटी तो वह उसे ढूंढने गया तो पाया कि खुले में याची उसकी मां के साथ दुष्कर्म कर रहा था। दिव्यांग होने के कारण वह मां को बचाने और उसका पीछा करने के लिए नहीं जा पाया।
मेडिकल जांच में इंटरकोर्स की तो पुष्टि हुई, लेकिन किसी तरह की चोट के निशान नहीं मिले। हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी बेटा अपने सामने मां से दुष्कर्म होता देख मौन रहा हो और 10 मिनट वहीं खड़ा रहा हो यह नहीं माना जा सकता। साथ ही कोई ऐसा ठोस सुबूत नहीं है जिससे आरोपी को दोषी साबित किया जा सके।
पीड़ित महिला की मानसिक स्थिति ऐसी थी कि उसका बयान भी रिकॉर्ड नहीं करवाया जा सकता था। साथ ही कोर्ट ने कहा कि आबादी से केवल 200 मीटर की दूरी पर खुले में दुष्कर्म की कोशिश कोई भी नहीं करेगा। आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच विवाद भी लंबित है। ऐसे में आरोपी को बेनिफिट ऑफ डाउट देते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी करने के आदेश दिए हैं।