पंजाब को आ रही विशेष मुश्किलों के हल के लिए सूबे को विशेष आर्थिक रुतबा देने के अलावा खसखस की खेती करने की इजाजत देने की भी जरूरत है। यह बात गुरूवार को मुक्ति यात्रा के दौरान बठिंडा पहुंचे पूर्व सांसद जगमीत बराड़ और पटियाला से आप के सांसद धर्मवीर गांधी ने कही। दोनों नेताओं ने कहा कि मांगों की पूर्ति के लिए वह हमख्याली लोगों के साथ मिलकर एक बड़ा राजनीतिक बदलाव लाने का प्रयास करेंगे।
मुक्ति यात्रा के तहत बठिंडा पहुंचे दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत दौरान कहा कि पंजाब के पानी, बोली, क्षेत्र और राजधानी का हक दूसरे राज्यों को देकर पंजाब के साथ पिछले कई दशकों से धक्केशाही की जा रही है। दोनों नेताओं ने कहा कि पंजाब आज खेती के गंभीर संकट का सामना कर रहा है। वहीं बेरोजगारी और नशों ने सूबे की जवानी के एक हिस्से को तबाह कर दिया है।
रोजगार की तलाश में बाकी युवा पीढ़ी ने विदेशों में जाना शुरू कर दिया है। अगर ऐसे ही हालात रहे तो अगले तीस वर्षों तक स्थिति यह बन जाएगी कि पंजाब को अपना नाम बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। केंद्र की तरफ से लगाए जा रहे टैक्सों पर गांधी ने कहा कि यह बेइंसाफी है।
पूर्व सांसद जगमीत बराड़ ने पंजाब को विशेष दर्जा दिलाने की मांग पर कहा कि इस सरहदी राज्य को केंद्र सरकार बड़ा आर्थिक पैकेज दे। दोनों नेताओं ने मांग की कि खेती के संकट के अलावा केमिकल और सिंथेटिक नशे से जवानी को बचाने के लिए दूसरे राज्यों की तरफ पंजाब को भी सरकारी कंट्रोल के अधीन खसखस की खेती करने के लिए मंजूरी दी जाए। इस मौके पर दोनों नेताओं के साथ सतवंत सिंह औलख, गुरविंदर सिंह मान, डाक्टर बलतेज सिंह के अलावा अन्य उपस्थित थे ।