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जानिए एग्रीकल्चर समिट में किसने क्या कहा!

Thu, 20 Feb 2014 12:16 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चप्पड़चिड़ी (मोहाली)
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मुख्यमंत्री बादल ने खेती के संकट पर गंभीरता से विचार रखे। पर बीच-बीच में हल्के-फुल्के अंदाज में भी नजर आए। वे बोले-बलबीर सिंह राजेवाल कह रहे हैं कि किसानों से बात नहीं करते। जबकि, पूछता भी हूं और अमल भी करता हूं।
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मैं खुद किसान हूं, पॉलिटिक्स में बस दांव ही लग गया। वैसे भी पॉलिटिक्स में दांव ही लगता है। पर मेहनत इसमें भी लगानी पड़ती है। मैंने सरपंच से शुरु किया था, फिर ब्लॉक समिति, जिला परिषद और विधायक तक पहुंचा। पहले सबसे युवा सीएम बना, अब सबसे बुजुर्ग सीएम हूं। खेती की लंबी दास्तान है।

मैं साइंटिस्ट नहीं हूं, सिंपल बीए की है। पर तजुर्बा भी बड़ी चीज है। मुझे भी कहीं अनस्किल्ड लेबर ही न समझ लेना। सीएम बादल ने माहिरों से कहा कि यूनिवर्सिटी व विभागों के विशेषज्ञों में कम्युनिकेशन कम है। एक्सटेंशन सर्विस किसानों तक पहुंचानी चाहिए। फिर राज्य सरकार की भूमिका पर सीएम बोले- हमें कोई शिकायत नहीं दे सकता। जो बस में है किया।
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ट्यूबवेल के पानी के लिए बिजली मुफ्त देने पर लोग नुक्ताचीनी करते हैं। न देते तो किसानों की रीढ़ टूट जाती। साठ हजार का कर्ज हो जाता। जब तक मैं हूं यह जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि खेती व पशुपालन में सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जाएगा, जहां हर समस्या का हल होगा।

30 साल बाद बांझ हो जाएगी पंजाब की धरती

प्रोग्रेसिव पंजाब एग्रीकल्चर समिट के आखिरी सेशन में पूर्व खेतीमंत्री सोमपाल शास्त्री ने आगाह किया कि यदि अभी कुछ न किया गया, तो पंजाब की धरती तीस साल बाद बांझ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि 1994 में सर्वे के दौरान मां के दूध में डीडीटी के गामा रेसिड्यू की मात्रा मिली, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से 84 गुना ज्यादा थी।

शास्त्री ने तहसील के बजाय किसान स्तर पर फसल बीमा की हिमायत की। उन्होंने कहा कि अपनी मंडी को बढ़ावा देना चाहिए, आंध्र प्रदेश में यह प्रयोग सफल रहा। बिचौलिये हटने से किसानों की आय बढ़ी है। नहरी पानी सिर्फ दस फीसदी उपयोग होता है, इसके लिए ड्रिप इरिगेशन जरूरी है।

इस पर सब्सिडी और बिजली दी जाए। पशुओं की पुरानी देसी नस्लें खत्म हो रही हैं, उन्हें बचाया जाए। रोजगार बढ़ाने को चीन मॉडल अपनाया जाए। हमारे तकनीकी कॉलेजों में 41 कोर्स हैं, वहां छह हजार। खेती को फायदेमंद धंधा बनाने की शुरुआत भी पंजाब से हो।

मंडीकरण का प्रबंध करे सरकार

पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. जीएस कालकट ने कहा कि खेती को फायदेमंद बनाने के लिए फसली चक्र से निकलना जरूरी है। इसके लिए सरकार किसानों द्वारा पैदा किए जाने वाले फल, सब्जी, दूध आदि के मंडीकरण का प्रबंध करे। वरना, किसान आने वाले दिनों में आर्थिक रूप से और कमजोर हो जाएंगे।

किसानों की सब्जियों को इकट्ठा करने के लिए कलेक्शन सेंटर बनाए जाने चाहिए। खेती खर्च घटाने के लिए आधुनिक मशीनरी पर सब्सिडी दी जाए। पानी के गिरते स्तर को बचाने के लिए भविष्यमुखी रणनीति बनानी चाहिए। धान के रकबे को घटाना, ड्रिप और स्प्रिंक्लर सिंचाई को बढ़ावा देना चाहिए।

सरकार तैयार करे प्रोड्यूसर कंपनियां

कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट्स एंड प्राइजेज के चेयरमैन डॉ. टीआर हक ने कहा कि सरकार को प्रोड्यूसर कंपनियां तैयार करनी चाहिए। इससे किसान अपनी पैदावार सांझे तौर पर लाभदायक क्षेत्रों में बेच सके। देश में किसानों की भलाई के लिए नीतियों की कमी है, जो बनीं वे लागू नहीं हो सकीं।

आर्थिक सुरक्षा न मिलने से किसानों की हालत खराब हो चुकी है। उत्पादन खर्च बढ़ने से लाभ घटता जा रहा है। सरकार को खेती आधारित इंडस्ट्री को बढ़ावा देना चाहिए। डॉ. हक ने कहा कि उन्होंने सरहदी इलाकों का दौरा किया, वहां किसानों के कृषि कार्ड तक नहीं बने हैं। वे किसान दूसरों से पिछड़े हैं।

ज्यादा झाड़ वाली फसल की जरूरत

धान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त माहिर डॉ. गुरदेव सिंह खुश ने कहा कि किसानों को ऐसी फसलें चाहिए, जिनमें 25-30 फीसदी ज्यादा झाड़ मिले। क्योंकि, खेती योग्य जमीनें लगातार घटती जा रही हैं। रिसर्च इंस्टीट्यूट बायो टेक्नोलॉजी के सहारे इस पर काम करें। यह तकनीक बीमारियों में भी सहायक है। क्योंकि, 25 फीसदी फसल बीमारियों से खराब हो जाती है।

मिट्टी खराब हो रही है, पानी कम हो रहा है। धान का रकबा कम करना होगा, धान की सीधी बिजाई से तीस फीसदी पानी बचता है। खाद पूरे खेत में एक समान डालने के बजाय जगह की जरूरत के हिसाब से डालनी चाहिए। विकेंद्रीयकरण के लिए मक्का और सोयाबीन अच्छे विकल्प हैं। पीएयू को सोया के क्षेत्र में काम करना चाहिए। किसानों को पशुपालन भी अपनाना चाहिए।

सब्सिडी बढ़ाने की जरूरत

पीएयू के वीसी डॉ. बीएस ढिल्लों ने कहा कि खेतीबाड़ी और इस पर आधारित अन्य धंधों पर दी जाने वाली सब्सिडी विदेशों के मुकाबले बहुत कम है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। किसानों को भी सिर्फ खेती पर निर्भर रहने के बजाय सहायक धंधे अपनाने चाहिए। एक किसान के बजाय सांझे तौर पर औजार खरीदने चाहिए। उन्होंने एक मेंबर के बजाय पूरे परिवार को खेत में काम करने का सुझाव दिया।

दूध की कीमत से ज्यादा बढ़े खर्च

गडवासू के वीसी डॉ. वीके तनेजा ने कहा कि पिछले सालों के दौरान जितने दूध के दाम बढ़े, उससे ज्यादा फीड और अन्य चीजों के बढ़ गए। किसानों को मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। 80 फीसदी दूध, मीट छोटे किसान पैदा करते हैं।

उनके पशुओं की क्वालिटी अच्छी नहीं है, लागत भी ज्यादा है। किसानों को सब्सिडी देने की जरूरत है। किसानों को भी दूध के बजाय उसके उत्पाद तैयार करके बेचने चाहिए। पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए निजी साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए।
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एमएसपी खत्म करेगी केंद्र सरकार

भाकियू प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने आखिरी सेशन में बड़े संकट की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि बाली कांफ्रेंस में केंद्र सरकार मान आई है कि चार सालों में एमएसपी और खरीद सिस्टम खत्म कर देंगे। किसानों को बाजार के हवाले कर दिया जाएगा। केंद्र से मुद्दा उठाना चाहिए कि खेती का खर्च निर्धारित करें, फिर उस पर मुनाफा दे दें।

एजुकेशन पैटर्न एक करना चाहिए, कंपनियों को गांव के नौजवानों को ट्रेनिंग और रोजगार देना चाहिए। मुलाजिमों के लिए पे-कमीशन है, इंडस्ट्री के लिए इंसेंटिव। किसानों के लिए भी फार्मर इनकम कमीशन और सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाना चाहिए। रिटायरमेंट के बाद फंड मिलेगा तो बच्चे भी देखभाल करेंगे।
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