पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश भर में कश्मीरी छात्रों को विरोध का दंश झेलना पड़ा। अब उन्होंने आपबीती सुनाते हुए अपना दर्द बयां किया और एक इंटरव्यू के दौरान कई खुलासे किए। सीजीसी लांडरा में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में अगर आतंकवाद की समस्या न होती, तो हम भी अपने माता-पिता के पास रहते। जम्मू-कश्मीर में ही पढ़ाई करते। लेकिन खौफ के मारे हम जम्मू-कश्मीर से बाहर दूसरे राज्यों में जाकर पढ़ने को मजबूर हैं। मना करने पर भी माता-पिता खुद हमें जबरदस्ती बाहर पढ़ने को भेज देते हैं।
छात्रों ने अमर उजाला से बात करते हुए अपना दर्द कुछ इस तरह से बयां किया। गौरतलब है कि इस शिक्षण संस्थान में जम्मू-कश्मीर के 440 स्टूडेंट पढ़ते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एग्जाम कंप्लीट किए हैं। इन स्टूडेंट्स ने स्थानीय छात्रों के नेतृत्व में बुधवार को कश्मीर घाटी में शांति की कामना करते हुए और शहीद जवानों की याद में कैंडल मार्च भी निकाला। बीटेक सेकेंड ईयर के स्टूडेंट खान वामेयर ने कहा कि वह अपने मिड सेमेस्टर की परीक्षा को बर्बाद करना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने घर जाने के बजाय यहीं रहने का फैसला लिया। क्योंकि वहां हालात इन दिनों खराब चल रहे हैं।