यूटी सचिवालय में सोमवार को आयोजित होने वाले प्रशासक शिवराज पाटिल के जन सुनवाई सत्र को रद्द कर दिया गया है।
अब उम्मीद है कि पाटिल 25 नवंबर या 2 दिसंबर को लोगों की शिकायतें सुनेंगे।
इस बार के सत्र के लिए 10 लोगों की शिकायतें पहुंचीं थीं जिनमें से आठ शिकायतकर्ताओं को पाटिल के सामने पेश होना था।
इसके लिए प्रशासन के अधिकारियों ने तैयारी भी कर ली थी और शिकायतकर्ताओं को फोन भी कर दिए गए थे। लेकिन, शनिवार को राज भवन से सूचना आने के बाद सोमवार को होने वाले जन सुनवाई सत्र को रद्द कर दिया गया।
पाटिल के जन सुनवाई सत्र में आने वाले शिकायतकर्ताओं की संख्या अब बढ़ने लगी है। जन सुनवाई सत्र के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए दो माह से सत्र के मिनट्स रिकॉर्ड होने और एक्शन टेकन रिपोर्ट बननी भी शुरू हो गई है।
इसके आदेश पाटिल ने दिए हैं। पहले ऐसा नहीं होता था। इससे सत्र में आने वाले लोगों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए पाटिल की ओर से दिए गए निर्देश के बाद भी उनका समाधान नहीं होता था।
पाटिल ने अब खुद पिछले सत्र की एक्शन टेकन रिपोर्ट देखनी शुरू कर दी है। इस संबंध में वे अधिकारियों को निर्देश भी देते हैं।
यह अमर उजाला के अभियान ‘बेबस फरियादी’ का असर है जिसके तहत दरबार में पहुंचे लोगों की समस्या हल न होने के संबंध में खबरें छापी गई थीं।
इससे पहले पाटिल का जन सुनवाई सत्र 21 अक्तूबर को हुआ था जिसमें आठ लोगों की शिकायतें पहुंची थीं। इस माह से पहले जितने भी जन सुनवाई सत्र हुए उसमें तीन या चार शिकायतकर्ता ही पहुंचे थे।