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शोधार्थियों पर दबाव न बनाए पीयू, उनके भविष्य के बारे में सोचे

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चंडीगढ़। पीयू की ओर से छात्रावास खाली करवाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ शोधार्थी अपने घर गए, लेकिन कई नहीं जाना चाहते। वे यहीं पर रहकर पढ़ना चाहते हैं। बीते कई दिनों से यह मुद्दा चल रहा है। उधर, शिक्षकों का कहना है कि पीयू को शोधार्थियों पर दबाव नहीं बनाना चाहिए। उनके भविष्य की ओर ध्यान देना चाहिए।
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पीयू ने पिछले साल कोरोना के कारण सभी छात्रावास खाली करवा लिए थे। उसके बाद बमुश्किल छात्रों को दोबारा छात्रावास मुहैया हुए थे। केवल शोधार्थियों व कुछ परास्नातक के विद्यार्थियों को बुलाया गया था। बाकी स्नातक व अन्य छात्रों को कमरे आवंटित ही नहीं हुए। इस बार फिर कोरोना तेजी से बढ़ रहा है। पीयू ने शोध कर रहे छात्रों से छात्रावास खाली करने को कहा है। छात्रों ने इसके लिए प्रदर्शन किया, लेकिन पीयू अभी अंतिम निर्णय नहीं ले पाई। पीयू के कुछ वरिष्ठ शिक्षकों ने इस पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा है कि शिक्षक फ्लैट में दो ही कमरे हैं। वहां दो कमरों में जिस तरह चार से पांच लोग रह रहे हैं। उसी तरह छात्र छात्रावासों में आसानी से रह सकते हैं, क्योंकि छात्रावासों के एक कमरे में अधिकतम दो ही छात्र रहते हैं। ऐसे में वह घरों से अधिक सुरक्षित हैं। कुछ शिक्षकों ने तो यह भी कहा है कि जिन शिक्षकों के पास घर में पर्याप्त जगह नहीं है और वह क्वारंटीन रहना चाहते हैं तो उनके लिए पीयू को अपने गेस्ट हाउस खोलने चाहिए ताकि कोरोना परिवार के अन्य सदस्यों में न फैल सके। हालांकि पीयू का तर्क है कि वह शोधार्थियों के हित में ही निर्णय लेगी।
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