चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी शासन सुधार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी की तीसरी बैठक सोमवार को तीन घंटे तक चली। कमेटी ने आए सभी सुझावों को ध्यान में रखा और एक राय बनी है कि सीनेट में सदस्यों की संख्या कम होनी चाहिए। इसके अलावा कमेटी डीन आदि के चुनाव की पक्षधर नहीं है। कई अन्य बदलाव भी कमेटी चाहती है, जिसकी गोपनीय रिपोर्ट चांसलर कार्यालय भेजी जाएगी। इससे पहले पंजाब सरकार के विचार एक सप्ताह में आएंगे, जिसे शामिल करते हुए कमेटी चांसलर को भेजेगी।
पीयू शासन सुधार के लिए 11 सदस्यीय कमेटी ने बैठक की। कमेटी ने आए 250 से अधिक सुझावों पर मंथन किया। हर सुझाव पर बात की। सदस्यों ने कहा कि सीनेट के सदस्यों की संख्या कम करने, स्नातक वर्ग के चुनाव की आवश्यकता न होने, पीयू के शिक्षकों की भागीदारी सीनेट में बढ़ाने समेत कई सुझाव आए। इन सभी सुझावों पर एक-एक कर बात हुई है। समिति बैठक के निर्णय को चांसलर कार्यालय भेजेगी। चांसलर कार्यालय इन सिफारिश को कब लागू करवाएगा? यह अभी तय नहीं है। सूत्रों का कहना है कि एकेडमिक पदों पर शिक्षकों को ही कमेटी बैठाना चाहती है। साथ ही राजनीति से सीनेट को दूर रखना भी उनका मकसद है ताकि शिक्षण कार्य बेहतर ढंग से हो सकें। शिक्षकों की भागीदारी बढ़ने से समस्याएं और जल्दी हल होंगी।