पंजाब विश्वविद्यालय में होने जा रही अस्थायी शिक्षकों की भर्तियों पर आखिरकार रोक लगा ही दी गई। अमर उजाला ने बैकडोर एंट्री का राज खोला तो पीयू का बड़ा खेल सार्वजनिक हो गया। इस प्रकरण को सीनेटरों ने केंद्र सरकार तक पहुंचा दिया। वहां से दबाव आने के बाद भर्तियों पर रोक लगा दी गई।
पिछले साल पीयू ने 26 शिक्षकों की स्थायी भर्ती के लिए रिक्तियां निकाली थीं लेकिन यह भर्तियां सिंडिकेट के कारण नहीं हो पाईं। जांच पर जांच चलती रहीं लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। अब कोरोना के बीच में पीयू ने 13 विभागों में 22 शिक्षकों की अस्थायी भर्तियां करने के लिए योजना तैयार करके रिक्तियां निकाल दीं। यह बात तमाम लोगों को पता ही नहीं चली।
अमर उजाला ने इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाया क्योंकि इसके जरिए नया खेल खेलने की तैयारी की जा रही थी। पहले इन शिक्षकों की अस्थायी भर्ती की जाती और अगले साल तक यह शिक्षक स्थायी होने के कगार पर पहुंचते यानी पात्र लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता। पीयू ने फिलहाल प्रशासनिक कारण बताते हुए मंगलवार को इन भर्तियों पर रोक लगा दी है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के कई नेताओं का दबाव भी पीयू पर पड़ा है।
26 स्थायी शिक्षकों की रिक्तियां भरना जरूरी
पीयू की ओर से भले ही 22 अस्थायी शिक्षकों की भर्तियों पर रोक लगा दी गई हो लेकिन पीयू को शिक्षकों की आवश्यकता है। उसके लिए पीयू को साफ-सुथरा रास्ता अपनाना होगा। बैकडोर एंट्री को रोकना होगा। कुछ शिक्षकों ने बताया कि छात्र व शिक्षकों का अनुपात पूरा होना चाहिए क्योंकि इसमें कमी पर रैंकिंग भी प्रभावित होती है।
शिक्षकों की संख्या पीयू में कम होने के कारण पिछले वर्षों में आई रैंकिंग भी पिछड़ी हैं। इसके लिए सभी पीयू को शिक्षकों की भर्तियां करनी होंगी। शिक्षकों का कहना है कि पिछले साल 26 शिक्षकों की जो रिक्तियां निकाली गई थीं, वे भरी जानी चाहिएं। यदि उन भर्तियों को भी रोका जा रहा है तो नए सिरे से नई भर्तियां की जाएं लेकिन स्थायी शिक्षक रखे जाएं।
यदि अस्थायी शिक्षक रखे जाएंगे तो इसमें पक्षपात होगा और निष्पक्षता नहीं रहेगी। यही शिक्षक फिर एक साल बाद स्थायी नौकरी की मांग करेंगे। साथ ही पीयू को भी उनके अनुभव को देखते हुए स्थायी शिक्षक बनाना होगा। सीनेटर डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा किपीयू को स्थायी शिक्षकों की नियुक्तियां करनी चाहिएं।