चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी पांच साल में दो महत्वपूर्ण कार्य नहीं कर सका। पहला विभागों को मर्ज और दूसरा पास्ट सर्विस काउंट। दोनों ही मुद्दों की कामयाबी पर पीयू का नाम रोशन होगा, लेकिन रुचि नहीं ली जा रही। सवाल उठ रहा है कि पीयू की जिम्मेदार अधिकारी इन कामों को क्यों लंबित किए हुए हैं। यह काम लंबित रहे तो पीयू की रैंक पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
कमेटियों में उलझी पीयू
वर्ष 2015 में नैक की टीम ने पीयू का दौरा किया था। उस दौरान पाया कि पीयू में छोटे छोटे विभाग हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी दिखी। छोटे विभागों में कर्मचारी भी कम रहे। इस पर नैक की टीम ने सुझाव दिया कि छोटे विभागों को उनसे मिलते जुलते विभागों के साथ मर्ज किया जाए। विभाग का नाम एक ही रहे। उसी विभाग में पीयू चाहे तो सेंटर का नाम दूसरे विभाग को दे सकती है। नैक की टीम दौरा करके चली गई। एक साल बाद पीयू ने कमेटी बनाई और प्रस्ताव बना, लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चला गया। इस प्रकरण को अखबारों में कई बार प्रकाशित किया गया। यह भी बताया गया कि पीयू यह काम नहीं करेगी तो उसको क्या क्या नुकसान हो सकते हैं, लेकिन पीयू के जिम्मेदारों ने काम नहीं किया। तीन साल बाद फिर कमेटी बनी। वह भी इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ा पाई। पिछले साल फिर कमेटी एक और बनी। उस कमेटी ने प्रस्ताव पास किया, लेकिन विवाद भाषा से जुड़े विभागों को लेकर खड़ा हो गया। विवाद का हल करने के बजाय पीयू बैकफुट पर आ गई और मामला फिर लंबित कर दिया गया। पीयू के जानकारों का कहना है कि समस्या से बचना समाधान नहीं है। सामने आकर समस्याओं का निदान करना होगा।
शिक्षकों की तैनाती भी जरूरी, ध्यान दे पीयू
इसी तरह छात्र-शिक्षक अनुपात सही करने के लिए पीयू को नए शिक्षकों की तैनाती करनी चाहिए थी। 26 शिक्षकों के पद निकाले गए, लेकिन सिंडिकेट के सवाल उठाने के बाद उन पर निर्णय नहीं लिया गया जबकि फरवरी व मार्च माह में इनकी तैनाती पर निर्णय लेना था। इसी तरह 100 से अधिक शिक्षकों की पास्ट सर्विस काउंट का मामला कई वर्षों से लंबित हैं। कमेटियां बनती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच पाती। पुटा ने भी यह मामला उठाया, लेकिन पूरी ताकत इस पर नहीं लगाई। हालांकि पुटा की कुछ पहल के बाद ही पीयू की कमेटियों ने कुछ शिक्षकों को इसका लाभ दिया। कुछ की फाइलें जांच के लिए चल रही हैं। माना जा रहा है कि इस साल के आखिरी माह तक 40 से अधिक शिक्षकों को पास्ट सर्विस काउंट का लाभ मिल सकता है। शिक्षकों का कहना है कि यह तभी होगा जब पीयू प्रशासन इस कार्य को अपनी प्राथमिकता में शामिल करेगा।
वर्जन----
विभागों को मर्ज करने के लिए कमेटी पहले से बनी हुई है। उसकी बैठक होगी, तब निर्णय होगा। अन्य प्रकरणों पर भी निर्णय कमेटियां लेंगी।
- प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई, पीयू