चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय को अपने खजाने की चिंता है। खजाना लगभग खाली है। वहीं केंद्र सरकार से ग्रांट अभी नहीं मिली है। शिक्षकों व कर्मचारियों को अगले माह वेतन देने तक के लाले पड़े हैं। इसी को देखते हुए पीयू अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के रास्ते निकाल रहा है। पीयू में संचालित कैंटीनों का किराया भी जुलाई से लिया जा सकता है। हालांकि कैंटीन बंद हैं।
पीयू में हर विभाग की अपनी कैंटीन हैं। संचालित कैंटीनों की संख्या 40 से अधिक है। इसके अलावा मार्केट के होटल, स्टूडेंट सेंटर की दुकानें आदि हैं। लॉकडाउन जब मार्च में लगा था तो पीयू ने 30 मार्च तक का किराया माफ कर दिया था। उसके बाद पीयू ने कोई संशोधित आदेश जारी नहीं किया। किसी ने यह भी कहा कि लॉकडाउन तक का किराया नहीं लिया जाएगा। अब लॉकडाउन की प्रक्रिया नहीं रही। इस पर सूत्रों का कहना है कि कैंटीन संचालकों से पीयू किराया ले सकता है क्योंकि पीयू को घाटा हो रहा है।
वहीं दूसरी ओर दुकानदारों का मत है कि उनकी कैंटीन बंद हैं। कमाई हो नहीं रही है तो वे किराया कहां से देंगे। कुछ लोगों का कहना है कि पीयू कैंटीन का किराया आधा भी कर सकता है लेकिन संचालकों को जुलाई से यह पैसा देना पड़ सकता है। इसी सप्ताह में इस मामले पर फाइनल निर्णय होगा। इससे कैंटीन संचालकों व दुकानदारों में हड़कंप मचा हुआ है।