पंजाब यूनिवर्सिटी को 140 विद्यार्थियों की सेवा करने पर हर माह 15 लाख का चूना लग रहा है। यह रकम बिजली पर खर्च हो रही है। यदि ये विद्यार्थी घर चले जाएंगे तो पीयू की यह मोटी रकम बच जाएगी। इसके अलावा अन्य खर्चे भी कम हो जाएंगे। साथ ही छात्र भी घर जाने के बाद कोरोना के अधिक सुरक्षित होंगे। क्योंकि यहां हॉस्टलों के स्टूडेंट्स एक साथ उठ बैठ रहे हैं। खाना खा रहे हैं और घूम रहे हैं।
ऐसे में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। पीयू के पास 20 हॉस्टल हैं। इन हॉस्टल में लगभग आठ हजार स्टूडेंट हर साल निवास करते हैं। इनसे बाकायदा किराया तीन माह का एडवांस लिया जाता है। जब सभी विद्यार्थी एक साथ रहते हैं तो पीयू को हॉस्टलों के जरिये किराये से आमदनी होती है, लेकिन जब हॉस्टल खाली होते हैं तो नुकसान भी रहता है। जून तक का किराया सभी स्टूडेंट्स ने पीयू को दे रखा है।
जुलाई से किराया छात्र नहीं देते। इस माह में रिजल्ट आदि आता था। इसलिए इस माह हॉस्टल खाली रहते थे, लेकिन इस बार कोरोना के कारण 140 स्टूडेंट हॉस्टलों में निवास कर रहे हैं। किसी हॉस्टल में 5 तो किसी में 10 स्टूडेंट रह रहे हैं। खाने के लिए एक मेस का संचालन हो रहा है। सफाई व्यवस्था के लिए भी लोगों को लगाया गया है। इस बारे में प्रो. एसके तोमर ने कहा कि हॉस्टलों का खर्चा अधिक आ रहा है। कुछ छात्र स्वेच्छा से घर जा रहे हैं। बचे छात्रों को इकट्ठा किया जाएगा, ताकि खर्चा कम आए।