पंजाब यूनिवर्सिटी ने पिछले साल निकाली स्थाई 26 असिस्टेेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां तो नहीं की, लेकिन अब फिर से 13 विभागों के लिए 22 अस्थाई असिस्टेंट प्रोफेसरों की रिक्तियां और निकाल दीं। इसको लेकर सिंडिकेट और सीनेट ने कड़ी आपत्ति दायर की है। उन्होंने साफ कहा है कि इस प्लान से बैकडोर का रास्ता साफ हो जाएगा। अस्थाई शिक्षक साक्षात्कार के माध्यम से रखे जाएंगे और एक साल बाद वही स्थाई नियुक्तियों के हकदार हो जाएंगे। शिक्षकों ने भी कहा है कि पहले स्थाई नियुक्तियां की जाएं जो पिछले साल निकाली गई थीं।
पिछली रिक्तियों पर नहीं हो पाया निर्णय
पिछले साल 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां एमएचआरडी की अनुमति के बाद किए जाने का रास्ता साफ हुआ। रिक्तियां निकाली गईं और आवेदन मांगे गए। एक हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किए। उ्सके बाद सिंडिकेट की बैठक हुई तो रिक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए। कहा कि जिन विभागों को शिक्षकों की आवश्यकता है उन विभागों में रिक्तियां नहीं निकाली गईं। सिंडिकेट ने सभी विभागों के रिकॉर्ड जांच करने के बाद भर्तियां करने को कहा। जांच हुई तो नौ भर्तियां करने का रास्ता साफ हुआ, लेकिन यह भी नहीं हो पाई। इन पर भी आपत्तियां लगाई गईं और महज दो से तीन ही भर्तियां करने को कहा गया। धीरे-धीरे इस प्रस्ताव पर ठंडा पानी डाल दिया गया और मामला रफा-दफा हो गया।
यह सवाल उठाए गए
सिंडिकेट व सीनेट के सदस्यों ने कहा है कि इस समय कोरोना काल चल रहा है। सीनेट की बैठक हो नहीं सकती और सिंडिकेट की बैठक बुलाई नहीं जा रही है। सिंडिकेट के सदस्य इस समय सीनेट के चुनाव को लेकर भी व्यस्त हैं। साथ ही सीनेट का चुनाव टलने को लेकर वह अपने को थका हुआ महससू कर रहे हैं। इसी बीच यह रिक्तियां निकाली गईं जो साक्षात्कार के जरिये होंगी। सूत्रों का कहना है कि एक ग्रुप जो आपत्तियां दायर करता है वह इस समय निष्क्रिय दिख रहा है और इसी बीच यह अस्थाई नियुक्तियां पीयू प्रशासन कर लेगा। सीनेटर डॉ. सुभाष शर्मा समेत कई ने आपत्तियां दायर की हैं। हैरत तो ये है कि पहले जो नियुक्तियां निकाली गई थीं उनसे अलग विभागों में अब निकाली गई हैं। हालांकि कुछ विभाग मिलते-जुलते हैं। मालूम हो कि अब जो नियुक्तियां की जा रही हैं वह केवल साक्षात्कार के आधार पर ही की जा रही हैं।