चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध कॉलेजों को खर्च सरकारी रकम का हिसाब मानव संसाधन विकास मंत्रालय को देना होगा। इसके लिए बाकायदा उपभोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना पड़ेगा। मंत्रालय के पत्र के बाद सभी संस्थान हिसाब लगाने में जुट गए हैं। हिसाब देने के बाद ही आगे की किस्त संबंधित संस्थानों को मिलेगी।
हर साल विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को कई मदों में मंत्रालय की ओर से करोड़ों रुपये जारी होते हैं। इस रकम का बाकायदा ऑडिट होता है लेकिन कई बार बिलों की पूर्ति संबंधित संस्थान नहीं कर पाते, जिससे ऑडिट आदि में आपत्ति लग जाती है। आपत्ति का निस्तारण जब तक नहीं हो जाता है तब तक आगे की कार्रवाई नहीं हो पाती है। इससे बजट की दूसरी किस्त भी देरी से मिलती है। अब ऑडिट होगा लेकिन आपत्ति का निस्तारण संस्थान करते रहेंगे। उससे पहले संस्थानों को खर्च रकम के लिए उपभोग प्रमाण पत्र देना होगा। इसी के आधार पर संस्थानों को अगली रकम की किस्त जारी हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि कार्यों में व्यवधान न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। साथ ही व्यवस्था भी इससे पारदर्शी बनी रहेगी। इस पर संबंधित संस्थानों ने काम शुरू कर दिया है। जून माह के आखिर तक उपभोग प्रमाण पत्र एमएचआरडी को भेजे जाएंगे। हालांकि रकम खर्च की होगी तभी यह प्रमाण पत्र देना होगा।