पाकिस्तान की जेलों में सजा काटकर लौटे लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने दो जून की रोटी की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इन लोगों का कहना है कि आज उनके सामने दो जून की रोटी का संकट है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व बलजिंदर कौर (सरबजीत कौर की बहन का दावा करने वाली महिला) ने किया। प्रदर्शन की शुरुआत जलियांवाला बाग से हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शहीदों को नमन किया।
उन्होंने डीसी कमलप्रीत सिंह संघा से मिलकर उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर सरबजीत के परिवार को सरकार की तरफ से इतना कुछ मिला तो क्या वे लोग दो जून की रोटी की मांग सरकार से नहीं मांग सकते। इनकी मजबूरी कौन देखेगा। इन्हें भी तो वही धाराएं लगी थीं, जो सरबजीत को पाक हुकूमत ने लगाईं। कुछ तो सरबजीत के साथ भी कैद रहे हैं।
जासूसी के आरोप में पाकिस्तान के जेलों में सजा काट लौटे पंजाब के कई पूर्व कैदियों ने कहा कि आज वे दिहाड़ी पर रोटी कमाते हैं या रिक्शा चला रहे हैं। भले ही पाक जेलों में इन कैदियों पर ढाए गए सितम के निशान मिट गए हों, लेकिन दिल के जख्म अब भी हरे हैं। गुरदासपुर के किरपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जवानी पाक जेलों में काटी है। यातनाएं सही हैं, लेकिन आज उन्हें क्या मिला।
67 वर्षीय किरपाल सिंह बाइस साल तक जेल में रहे। महेन्द्र सिंह भी पाक में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। वे सरबजीत सिंह के साथ भी जेल में रहे। उन्होंने कहा कि वे आज रिक्शा चलाकर पेट भर रहे हैं।