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चंडीगढ़ प्रशासन के वीकेंड लॉकडाउन के फैसले से भड़के दुकानदार, जगह-जगह विरोध प्रदर्शन

Sat, 22 Aug 2020 02:57 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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विरोध प्रदर्शन करते दुकानदार - फोटो : अमर उजाला
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यूटी प्रशासन ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर शहर में वीकेंड लॉकडाउन लगाने का ऐलान कर दिया, लेकिन शनिवार को पूरा दिन लॉकडाउन के नियमों को लेकर असमंजस की स्थिति रही। पुलिस भी कंफ्यूज नजर आई। पूरे दिन शहर के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें आती रहीं जहां जिन दुकानों को खोलने की अनुमति थी, पुलिस द्वारा उन्हें भी जबरन बंद करा दिया गया।   

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शनिवार सुबह मनीमाजरा की पूरी मार्केट खुल गई। इसकी जानकारी जब स्थानीय पुलिस को लगी तो उन्होंने मार्केट में जाकर अनाउंसमेंट करवाई और दुकानों को बंद करने को कहा। इस दौरान दुकानदारों और पुलिस में बहस भी हुई। इसके बाद इंडस्ट्रियल एरिया से खबर आई कि स्थानीय पुलिस द्वारा जबरन फैक्ट्रियों को बंद कराया जा रहा है। 

इस पर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा प्रशासन के अधिकारियों से आग्रह किया गया कि जब फैक्ट्रियों को लॉकडाउन में खुलने की इजाजत है तो फिर पुलिस द्वारा क्यों बंद कराया जा रहा है। वही, मलोया स्मॉल फ्लैट्स कॉलोनी में खाने-पीने के दुकानदारों को पुलिस द्वारा खदेड़ दिया गया, जबकि मलोया के ही दूसरे हिस्से में खाने-पीने की दुकानें खुली रहीं। 
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स्थानीय दुकानदारों ने कहा कि प्रशासन ने आनन-फानन में वीकेंड लॉकडाउन तो लगा दिया, लेकिन विस्तृत आदेश जारी नहीं होने की वजह से अभी तक असमंजस की स्थिति है। पुलिस भी कंफ्यूज है, उन्हें नहीं पता है कि क्या करना है। इसकी वजह से उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों से ऐसी सूचनाएं आती रहीं।  

खाने पीने की दुकानें खुलीं, लोगों ने उठाए सवाल

वीकेंड लॉकडाउन के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में खाने-पीने की दुकानों को खोलने के आदेश जारी किए गए हैं। इसको लेकर शहरवासियों की तरफ से काफी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि वीकेंड पर ज्यादातर लोग खाने-पीने के लिए ही शहर के मार्केट में जाते हैं, ऐसे में वहां पर काफी भीड़ लगती है। 

शहर के रेस्टोरेंट और होटलों में सबसे ज्यादा भीड़ भी वीकेंड पर ही लगती है, ऐसे में वीकेंड लॉकडाउन लगाया गया लेकिन इन सभी को खोलने की मंजूरी दे दी गई। लोगों का यह भी कहना था कि जब प्रशासन सच में लॉकडाउन लगाना चाहता है, तो फिर इन्हें भी बंद करना चाहिए। हालांकि इस पर एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि शहर में ऐसे बहुत से लोग व विद्यार्थी हैं जिनके घर में किचन नहीं है। ऐसे में वह बाहर के खाने पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे लोगों को ध्यान में रखते हुए ही खाने-पीने की दुकानों को खोलने के आदेश जारी किए गए। 

वीकेंड पर लगती है भीड़, इसलिए दुकानों को किया बंद
चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा लगाए गए वीकेंड लॉकडाउन को लेकर शहर के विभिन्न मार्केट में शनिवार को धरने-प्रदर्शन किए गए। लोगों ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ प्रशासन जानबूझकर छोटे दुकानदारों को परेशान कर रही है और उन्हें काम करने से रोका जा रहा है। इस पर एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि शहर की दुकानों को बंद करने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि वीकेंड पर इन दुकानों में लोगों की भीड़ एकत्रित न हो। 

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन का ऐसा कोई इरादा नहीं है कि वह किसी का नुकसान करें। उन्होंने कहा कि निजी दफ्तरों, फैक्ट्रियों, होटल, बैंक आदि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पहले से ही चलाए जा रहे हैं। कोरोना से अभी लंबी लड़ाई लड़नी है, ऐसे में लंबे समय तक पूरी तरह से कर्फ्यू रखना ठीक नहीं है।

भड़के व्यापारी, सब्जियां बेच जताया विरोध

वीकेंड लॉकडाउन के फैसले से शहर के व्यापारी नाराज हैं। शनिवार को सेक्टर-23 में व्यापारियों ने अपनी दुकानों के आगे सब्जी व दूध बेचकर विरोध जताया। उनका कहना है कि लॉकडाउन के बाद मुश्किल से बाजार पटरी पर लौटा था। छुट्टी के दिनों में ग्राहकों का आना शुरू हुआ था। उसे भी प्रशासन ने बंद कर दिया है। यदि ऐसे में वीकेंड पर दुकानें बंद रहीं तो व्यापारी सड़क  पर आ जाएंगे। 

व्यापारी इस बात से भी दुखी थे कि बाजार बंद कर दिया गया, लेकिन लोगों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं है। रेस्टोरेंट खुले हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं। उस तरफ कोई भी ध्यान नहीं है। ऐसी स्थिति में सिर्फ दुकानें बंद करने से क्या होगा? दुकानदारों का कहना है कि छोटा व्यापारी तो बुरी तरह से पिस गया है। पहले तो ऑड-ईवन से दुकानें बंद थीं। 

प्रशासन के फैसले के खिलाफ शनिवार को सेक्टर-23, सेक्टर-15, सेक्टर-41, सेक्टर-19 पालिक व सदर मार्केट, सेक्टर 36 सहित कई अन्य मार्केट में प्रदर्शन हुआ। आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश सोनी ने एडवाइजर को पत्र लिखकर कहा है कि यह फैसला वापस होना चाहिए। इससे दुकानदार और टूट जाएंगे। व्यापारी नेता कैलाश चंद जैन ने कहा कि यह केवल तुगलकी फरमान है, जो बिना सोचे समझे दिया गया है।

व्यापार मंडल का आरोप, व्यापारियों के साथ भेदभाव
इन प्रदर्शनों को व्यापार मंडल का भी समर्थन रहा। सेक्टर 23 में व्यापार मंडल के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और अपना समर्थन दिया। एसोसिएशन के प्रधान अनिल वोहरा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने बिना व्यापारियों से बात किए वीकेंड लॉकडाउन का फैसला ले लिया। कोरोना के लिए सिर्फ व्यापारी जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वह अपने फैसले को वापस लें और व्यापारियों को राहत दें।

कार बाजार डीलर्स एसोसिएशन ने भी विरोध जताया

एसोसिएशन प्रधान गुलशन कुमार ने कहा कि सेक्टर-7 में कई दशक से लगने वाला कार बाजार को मनीमाजरा में शिफ्ट किए जाने के बाद से आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है। उसके बाद लॉकडाउन और अब वीकेंड लॉकडाउन से बुरी तरह से बाजार प्रभावित होगा। प्रशासन ने इस तरह का फैसला लेकर जल्दबाजी दिखाई है। कोरोना की रोकथाम के लिए प्रशासन को दुकानें बंद करवाने की बजाए अन्य पहलुओं पर सोचना चाहिए था।

क्या बोले व्यापारी

पूरा शहर खुला, सिर्फ दुकानें ही बंद
चंडीगढ़ प्रशासन का सबसे साफ्ट टारगेट व्यापारी होते हैं इसलिए दुकाने बंद करवा दी गईं जबकि पूरा शहर खुला हुआ है। कोई भी कहीं जा सकता है। दुकानों पर पहले से ही ग्राहकों की संख्या कम है। ऐसे में यह फैसला एक तरफा और बिना सोचा समझा लगता है। -चरणजीव सिंह, चेयरमैन व्यापार मंडल

प्रशासन का फैसला पूरी तरह से गलत

चंडीगढ़ प्रशासन का फैसला पूरी तरह से गलत है। रातोंरात अचानक फैसला लिए जाने से व्यापारियों का कच्चा माल काफी खराब हो गया। आमदनी नहीं होने से शोरूम तक खाली करने पड़ रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो दुकान में काम करने वाले कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। -संजीव चड्डा, महासचिव व्यापार मंडल

प्रशासन फैसले पर करे पुनर्विचार 
चुनौतीपूर्ण समय के दौरान प्रशासन द्वारा रखे गए कार्यों की सराहना करते हैं लेकिन वीकेंड लॉकडाउन व्यावसायिक समुदाय के लिए झटका साबित हुआ है। दो दिन दुकान बंद करने का मतलब है कि 40 फीसदी का नुकसान। प्रशासन से आग्रह है कि निर्णय की समीक्षा करे और उसे वापस लें। -नीरज बजाज, प्रधान, चंडीगढ़ बिजनेस काउंसिल

अब तो सुबह डर कर अखबार खोलता है दुकानदार
प्रशासन की मनमानी का आलम यह है कि जब मन आया ऑड-ईवन लगा दिया और जब मन आया साप्ताहिक बंदी कर दी। दुकानदार अगली सुबह डर कर अखबार खोलता है कि आज हमारे लिए क्या निर्णय ले लिया गया।  -नरेश महाजन, प्रधान, सेक्टर 23

प्रशासन मासिक किराया दे, फिर कर दें दुकानें बंद 

मार्केट में दुकानों का किराया 50 हजार से ऊपर है। जब दुकानें सप्ताह में तीन दिन खुलेंगी तो कहां से खर्चा निकलेगा। प्रशासन मासिक किराया देना शुरू कर दे और जो चाहे फैसला सुना दे। - संजीव कुमार, प्रधान, सेक्टर 15 पटेल मार्केट

छोटी मार्केट पर ही बस चलता है प्रशासन का 

बड़े शोरूमों में एसी लगे हैं, मॉल में एक सेल्स मैन कोरोना पॉजिटिव आ गया तो कोई समस्या नहीं। छोटी मार्केट जहां लोगों के लिए बोहनी करना मुश्किल है, वहां पर प्रशासन का जोर चल रहा है। - सुनील जैन, प्रधान, सेक्टर 41, कृष्णा मार्केट

भूखे मरने की नौबत आ जाएगी 

पहले ऑड-ईवन, अब साप्ताहिक बंदी। प्रशासन की ऐसे ही फैसले रहे तो दुकानदारों की भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। क्योंकि दुकान नहीं खुलेगी तो लोन की किस्त कहां से देंगे। - नरेश जैन, प्रधान, सेक्टर 19 पालिका मार्केट

आखिर कितना सहेगा दुकानदार
सरकार के फैसलों से पहले केवल किसान आत्महत्या करते थे। अब हालात यह हैं कि दुकानदार आत्महत्या करेंगे, क्योंकि इधर दुकान की किस्त और उधर परिवार का खर्च, आखिर कितना सहेगा एक दुकानदार। - नरेंद्र सिंह, प्रधान, सेक्टर 19, सदर मार्केट

लगाना है तो पूरे शहर में कर्फ्यू लगाए प्रशासन 
क्या केवल दुकानदारों से कोरोना फैलता है क्या। प्रशासन को लगाना है तो पूरे शहर में कर्फ्यू लगाए। कमरों में बैठकर फरमान जारी करने से कोरोना की चेन नहीं टूटने वाली है। - अनुज सहगल, प्रधान, सेक्टर 36
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मनीमाजरा:  दुकानें बद करने के फैसले के विरोध में उतरे व्यापारी

प्रशासन द्वारा शनिवार और रविवार को दुकानें बंद रखने के फैसले का मनीमाजरा के दुकानदारों ने विरोध जताया है। शनिवार सुबह 10 बजे मनीमाजरा के दुकानदारों ने ओल्ड एनएससी ऑफिस के सामने इकट्ठा होकर प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ आपत्ति जाहिर की।दुकानदारों का कहना है कि मनीमाजरा के दुकानदार पर इस फैसले से दोहरी मार पड़ेगी क्योंकि शनिवार और रविवार को प्रशासन ने दुकानें बंद रखने के आदेश जारी किए हैं तो सोमवार को मनीमाजरा की मार्केट की छुट्टी होने के कारण दुकानें बंद रहती हैं। 

इस तरह मनीमाजरा का बाजार अब इस फैसले के बाद तीन दिन तक बंद रहेगा। इससे व्यापारियों को बहुत नुकसान होगा। व्यापारियों के एकजुट होकर प्रदर्शन करने की सूचना मिलते ही मनीमाजरा थाना प्रभारी नीरज सरना मौके पर पहुंचे। उन्होंने व्यापारियों को समझाया कि यह फैसला प्रशासन का है, इसलिए अगर आपको इस संबंधी कोई शिकायत है तो वह एडवाइजर से मिलकर अपनी समस्या उनके सामने रखें और सोमवार को छुट्टी वाला मामला भी उन्हें बताकर इसका समाधान निकालें।

संयुक्त व्यापार मंडल के प्रधान प्रदीप बागरा, वरिंदर बंसल काका, प्रवीण गुप्ता, नितिन कपूर आदि ने बताया कि प्रशासन ने मनीमाजरा के दुकानदारों के साथ ज्यादती की है। इनका कहना है कि प्रशासन को पहले व्यापारियों के साथ एक मीटिंग करके इस तरह का फैसला लेना चाहिए था। दुकानदारों ने कहा कि बहुत सारे दुकानों का करीब 40-50 हजार रुपये किराया है। इसके बाद 4 से 6 कर्मचारियों को वेतन भी देना पड़ता है। ऐसे में अगर 3 दिन दुकानें बंद रहेंगी तो कारोबार नाममात्र हो जाएगा।

दुकानें बंद करने से कोरोना कम होता है तो हम तैयार... वरना नहीं : रमेश
कांग्रेसी ट्रेडर्स सेल के प्रधान रमेश गोयल का कहना है कि अगर दुकानें बंद करने से कोरोना कम तो वे ऐसा करने को तैयार हैं। प्रशासन व्यपारियो पर नकेल कसने की कोशिश करते हुए अपनी कमियां छुपा रहा है। व्यापारियों की दुकानें हफ्ते में तीन दिन बंद रहेंगी तो उनकी आमदन लगभग आधी हो जाएगी। व्यापारियों की मांग है कि प्रशासन सारे नियम उन पर ही लागू करने के बजाय अधिकारी वर्ग की तनख्वाह भी आधी करे।
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