चंडीगढ़। पानी के दामों कम करने पर मंगलवार को सदन की बैठक में चार घंटे तक बहस चली। इस दौरान वर्ष 2011 से चले आ रहे दामों को ही फिर से लागू करने का प्रस्ताव पास किया गया। वहीं नए प्रस्ताव के तहत पानी के कुछ स्लैब में बदलाव किया गया। सीवर सेस को 30 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया। नए दामों को कोरोना महामारी के बाद लागू करने को कहा गया है। हालांकि निगम आयुक्त ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सीवर सेस काफी कम किया जा रहा है। इससे निगम को नुकसान होगा। हालांकि नए दामों पर अंतिम फैसला प्रशासक वीपी सिंह बदनौर करेंगे। उधर, कांग्रेस ने एकबार फिर विरोध जताने के बाद सदन से वॉकआउट कर दिया।
नगर निगम की ओर से बढ़ाए गए पानी के दामों पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव मंगलवार को सदन में लाया गया। इस दौरान सदन को बताया गया कि पानी के दाम बढ़ाने को लेकर सितंबर माह में जारी अधिसूचना में बदलाव के लिए निगम ने एक और प्रस्ताव प्रशासन को भेजा है। प्रशासन ने आयुक्त की टिप्पणी का हवाला देते हुए निगम से पूछा है कि दाम घटाने के बाद निगम अपना घाटा कैसे पूरा करेगा। इस पर कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि हमने हर फैसले में भाजपा का साथ दिया लेकिन इस फैसले का विरोध करने के बावजूद भाजपा पार्षदों ने प्रस्ताव पास कर दिया। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ ने कहा कि हमने कहा था कि अपने फैसले पर भाजपा को पछताना पड़ेगा। आज वही हो रहा है। कांग्रेस पार्षद गुरुबख्श रावत ने कहा कि पानी के दाम बढ़ाने के प्रस्ताव पर भाजपा पार्षदों ने टेबल थपथपाई थी जबकि कांग्रेस पार्षद विरोध में थे। इस पर भाजपा पार्षद अरुण सूद ने कहा कि कांग्रेस ने चर्चा करने की बजाय सदन से चले जाने का आसान रास्ता चुना। हमने यूटर्न लिया है, लेकिन जहां शहर की जनता के हित की बात होगी तो बार-बार ऐसा करेंगे। भाजपा शक्ति प्रकाश देवशाली ने कहा कि कांग्रेस वर्ष 2011 से पानी के दाम थोड़े-थोड़े बढ़ाती तो आज अचानक लोगों पर यह बोझ न पड़ता।
बैठक में पहली दो स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। जबकि तीसरी और चौथी स्लैब में पानी के दाम कम कर दिए गए हैं। इस स्लैब में बड़े एवं अमीर लोगों के घर आते हैं जो कि ज्यादा पानी का इस्तेमाल करते हैं। वहीं पानी की बर्बादी का चालान पांच हजार रुपये से घटाकर, पहला चालान तीन हजार रुपये और दूसरा चालान पांच हजार रुपये का कर दिया है। इसके साथ ही खाने पीने के बूथों पर जो एक मुश्त राशि रखी गई थी, उसमें यह तय किया गया है कि जितना पानी का प्रयोग होगा उतना ही बिल आएगा। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ सदन में ही जमीन पर बैठ गए।
दोपहर की पेयजल आपूर्ति बंद करने पर भी विचार
निगम आयुक्त ने कहा कि दोपहर की दो घंटे की पेयजल आपूर्ति शुरू होने के बाद निगम पर सलाना 12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। आयुक्त ने कहा कि लोगों को इसकी जरूरत नहीं है इसलिए दोपहर की आपूर्ति को बंद कर सुबह व शाम एक-एक घंटा पेयजल आपूर्ति का समय बढ़ाया जा सकता है। भाजपा पार्षदों ने उस समय तो आपूर्ति बंद करने पर सहमति जता दी, बाद में रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों से बात कर इस पर निर्णय लेने का फैसला लिया। साथ ही यह रिपोर्ट पेयजल आपूर्ति कमेटी को देने को कहा।
नए प्रस्ताव के हिसाब से यह होंगे दाम
स्लैब वर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
शून्य से 15 किलोलीटर 3 रुपये 3 रुपये
16 से 30 किलोलीटर 6 रुपये 6 रुपये
31 से 60 किलोलीटर 12 रुपये 9 रुपये
60 से ऊपर किलोलीटर 24 रुपये 16 रुपये