चंडीगढ़ नगर निगम सदन की बैठक में शनिवार को पहली बार नगर निगम की तरफ से पार्किंगों को मुफ्त करने का प्रस्ताव लाया गया था, जिसके विरोध में सभी पार्षद खड़े हो गए और प्रस्ताव रद्द करना पड़ा। विरोध करने वालों में आम आदमी पार्टी के पार्षद भी शामिल रहे जबकि निगम चुनाव में आप ने जनता से वादा किया था कि चुनाव जीतने के बाद वह सभी पार्किंगों को मुफ्त करेंगे।
21 फरवरी से नगर निगम शहर की पार्किंगों का संचालन कर रहा है। तीन महीने के लिए टेंडर के जरिए एजेंसियों से पार्किंग चलाने के लिए कर्मचारी नियुक्त कराए गए हैं। इसकी मियाद 21 मई को खत्म हो रही है, इसलिए निगम यह प्रस्ताव लेकर आया था कि जब तक स्मार्ट पार्किंग के लिए नया टेंडर नहीं होता, तब तक शहर की पार्किंगों को निगम नहीं चलाएगा। हालांकि निगम ने जनता को देखते हुए यह फैसला नहीं लिया।
निगम का कहना है कि उन्हें पार्किंग चलाने में काफी नुकसान हो रहा है, इसलिए वह नई कंपनी का चयन करेंगे, जो पार्किंग चलाएगी। इसके लिए सदन की अगली बैठक में एजेंडा लाया जाएगा और फिर टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। तब तक पार्किंग की सुविधा लोगों को मुफ्त में मिल सकती थी, लेकिन इसके खिलाफ सभी पार्षद खड़े हो गए। कई पार्षदों ने सदन में कहा कि पार्किंग चलाने से निगम को भले कम पैसा आ रहा है, लेकिन वह भी कमाई है इसलिए पार्किंग को ऐसे ही जारी रखा जाए। बता दें कि 21 फरवरी से 20 अप्रैल तक नगर निगम ने शहर के पार्किंगों से 2,09,16,464 रुपये का राजस्व जुटाया। इसमें से 1,14,01,939 रुपये वेतन आदि में खर्च हो गए जिसके बाद निगम के पास कुल 95,14,525 रुपये बचे।
पार्किंग को मुफ्त करने का फैसला कुछ महीनों के लिए ही था। उसके बाद फिर पार्किंग पेड हो जाती। मुफ्त करने से पार्किंग में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी चली जाती, इसलिए हमने कहा है कि निगम को पार्किंग चलानी चाहिए। - दमनप्रीत सिंह, आप पार्षद व नेता प्रतिपक्ष