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पंजाब कैबिनेट की बैठक में फैसला, विशेष सत्र में आएगा सीएए-एनआरसी और एनपीआर विरोधी प्रस्ताव

Wed, 15 Jan 2020 01:13 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब कैबिनेट की बैठक - फोटो : फाइल फोटो
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के संबंध में सदन की इच्छा से आगे बढ़ेगी। इनके विरोध में विधानसभा के 16-17 जनवरी को होने वाले दो दिवसीय विशेष सत्र में प्रस्ताव लाया जाएगा। कैबिनेट की बैठक के बाद अनौपचारिक चर्चा के दौरान पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा मंगलवार को यह निर्णय लिया गया।

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सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, परिषद ने सीएए और एनआरसी के मायनों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन मुद्दों पर देशभर में भड़की हिंसा पर भी चिंता जताई। इससे राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के छिन्न-भिन्न होने का खतरा बढ़ गया है। मंत्रिमंडल का विचार है कि यह मामला विशेष सत्र के दौरान उठाया जाए। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सर्वसम्मति से मंत्रियों ने यह भी निर्णय लिया कि सरकार सदन की इच्छा को स्वीकार करे और उसी के अनुसार चले।

मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री के इस विचार पर सहमति व्यक्त की कि सीएए, विशेष रूप से जब एनआरसी और एनपीआर के साथ जोड़ा गया तो इससे भारतीय संविधान की उस प्रस्तावना का उल्लंघन हुआ है जोकि देश की नींव का आधार है। इस मौके पर पंजाब के महाधिवक्ता अतुल नंदा ने भी मंत्रिमंडल के समक्ष मामले पर कानूनी दृष्टिकोण पेश किया। प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार सदन की सिफारिश के अनुसार इस मुद्दे से निपटने के लिए अपनी रणनीति तय करेगी।

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मंत्रीमंडल ने ‘व्यापार का अधिकार एक्ट-2020’ को दी मंजूरी

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का कारोबार आसान बनाने के उद्देश्य से पंजाब मंत्रिमंडल ने विधानसभा के आगामी दो-दिवसीय विशेष सत्र में ‘पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट-2020’ (पंजाब व्यापार का अधिकार एक्ट-2020) लाने को हरी झंडी दे दी है। इस एक्ट का उद्देश्य नये सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना करना और चलाने के लिए स्व-घोषणा के उपबंध के अलावा विभिन्न मंजूरियों और पड़तालों से छूट देकर इन नई इकाइयों पर रेगुलेटरी का बोझ घटाना है। इस एक्ट से राज्य में एमएसएमई की स्थापना से पहले रेगुलेटरी मंजूरियों की थकाने वाली प्रक्रिया से बड़ी राहत मिलेगी।

इस एक्ट से विभिन्न रेगुलेटरी सेवाएं इसके घेरे में आ जाएंगी, जिनमें पंजाब म्युंसिपल एक्ट-1911 और पंजाब म्यूंसिपल कोर्पोरेशन एक्ट-1976 के अंतर्गत इमारत योजना और नये व्यापार लाइसेंस का मुकम्मल और कब्जी सर्टिफिकेट जारी करना, पंजाब रीजनल एंड टाऊन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट-1995 के अंतर्गत इमारत योजना और चेंज ऑफ लैंड का प्रयोग, पंजाब फायर प्रीवेंशन और फायर सेफ्टी एक्ट-2004 के अंतर्गत अनापत्ति सर्टिफिकेट, पंजाब फैक्ट्री रूल्स -1952 के अंतर्गत फैक्ट्री बिल्डिंग प्लान और फैक्ट्री लाइइसेंस और पंजाब शॉप्ज एंड कमर्शियल एस्टेबलिशमेंट एक्ट-1958 के अंतर्गत दुकानों की रजिस्ट्रेशन या स्थापना शामिल है। 

इस एक्ट में प्रत्येक जिले में डिप्टी कमिशनर, जोकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे, की अध्यक्षता में एक ज़िला ब्यूरो ऑफ एंटरप्राईज़ेज होगा, जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे और अन्य सदस्य समय-समय पर सरकार द्वारा नोटिफाई किये जाएंगे। ज़िला ब्यूरो ऑफ इंटरप्राइज को जिला स्तरीय नोडल एजेंसी का दर्जा दिया जायेगा जोकि राज्य सरकार और राज्य नोडल एजेंसी की समूची निगरानी, दिशा और नियंत्रण अधीन काम करेगा। इस एक्ट के अधीन जिला स्तरीय नोडल एजेंसी राज्य में एमएसएमई उद्योगों को सहायता और सुविधा, ‘डैकलरेशन ऑफ इंटैंट’ का रिकॉर्ड कायम और ‘सैद्धांतिक मंजूरी का सर्टिफिकेट’ देगा। 
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