अब हाउसिंग बोर्ड के मकान और कर्मिश्यल प्रापर्टी ट्रांसफर करवाने के लिए प्रक्रिया दौरान किसी का भी इंटरव्यू नहीं होगा। लोगों की सुविधा के लिए सीएचबी ने ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू के सिस्टम को पूरी तरह से समाप्त करने का फैसला लिया है। जीपीए ट्रांसफर पालिसी के साथ साथ यह म्युजअल ट्रांसफर पालिसी भी यह नया सिस्टम लागू होगा। अभी तक ट्रांसफर के दस्तावेज फाइनल करने से पहले अधिकार आवेदक का इंटरव्यू करते थे।
यह होगी प्रक्रिया
हाउसिंग बोर्ड के अनुसार आवेदन करने के लिए व्यक्ति को सभी दस्तावेज के साथ अपना फार्म सीएचबी के रिस्पेंशन काउंटर में जमा करवाना होगा। यहां पर पब्लिक रिलेंशन अधिकारी दस्तावेजों और फार्म चेक करके आवेदक को रसीद देगा। इस रसीद पर अधिकारी सभ्ीा दस्तावेजों का जिक्र भी करेगा जो साथ में फार्म कें सलग्न है। पब्लिक रिलेशन अफसर आवेदन फार्म को आगे संबंधित शाखा को भेजेगा।
संबंधित शाखा में सहायक अधिकारी पहले आओ पहले पाओ की नीति पर आवेदन पत्र पर काम करेगा। लेकिन यह सभी प्रक्रियाएं तत्काल स्कीम में लागू नहीं होगी। बोर्ड के अनुसार सहायक अधिकारी सभी दस्तावेज चेक करके आगे फार्म सेक्शन अधिकारी को भेजेगा। सेक्शन अधिकारी आगे अकाउंट अधिकारी को फार्म भेजेगा। अकाउंट अधिकारी दस्तावेज चेक करके अपने कंमेट देगा। अगर कोई आपति होगी तो इसकी जानकारी संबंधित आवेदक को दी जाएगी नहीं तो आवेदक को ट्रांसफर फीस जमा करवाने की जानकारी दे दी जाएगी।
अगर कोई मामला कानूनी होगा तो संबंधित शाखा इसके लिए कानूनी राय ले सकती है। आवेदक से फीस भरवाने और सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद डिलिंग सहायक अंतिम मंजूरी के लिए पूरी फाइल तैयार करेगा। संबंधित शाखा बैंक रसीद के नेंबर के अनुसार आगे की प्रक्रिया बढाएगी। यह वह बैंक रसीद होगी जो आवेदन की ओर से फीस जमा करवाने के बाद मिलेगी।
इसके बाद फाइल फिर से सेक्शन अधिकारी से होते हुए अकाउंट अधिकारी और चीफ अकाउंट अधिकारी के पास जांच के लिए जाएगी। उनकी जांच के बाद वह प्रापर्टी को ट्रांसफर करने की सिफारिश करेंगे। चीफ अकाउंट अधिकारी सीधा फाइल संबंधित अर्थारिटी को भेजेगा। अंतिम मंजूरी के बाद अर्थारिटी फिर से फाइल सीधा सेक्शन अधिकारी को ट्रांसफर करने के निर्देश के साथ भेजा देगा।
बहुत अच्छा किया
सीएचबी फेडरेशन के प्रवक्ता रजत मल्होत्रा का कहना है कि इंटरव्यू की प्रक्रिया समाप्त करके बोर्ड ने काफी अच्छा किया है उनका कहना है कि इससे समय की बचत होगी और आवेदक को काम करवाने में आसानी होगी। उनका कहना है कि इससे लोगों की परेशानी कम होगी।