पंजाब यूनिवर्सिटी शिक्षकों के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है। यही कारण है कि 120 से अधिक शिक्षकों की पास्ट सर्विस अब तक काउंट नहीं हो पाई। इस कारण शिक्षकों के प्रमोशन अटके हुए हैं। वर्षों से यह कार्य नहीं होने के कारण शिक्षकों में आक्रोश पनप रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पूटा) ने कई बार इस मुद्दे को उठाया लेकिन समुचित कार्रवाई नहीं हो पाई।
शुक्रवार को भी इस मुद्दे को हवा दी गई थी। पीयू प्रशासन अब कमेटी की बैठक करवाने की तैयारी कर रहा है। पीयू में रेगुलर शिक्षकों की संख्या लगभग 650 है। इन शिक्षकों को समय समय पर प्रमोशन मिलते हैं जो आसान नहीं है। उसके लिए शिक्षकों को कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
अनुभव लंबा.. लेकिन नहीं हो पाया प्रमोशन
कई शिक्षक ऐसे हैं जो दूसरे विभागों में कार्यरत थे और उन्होंने पीयू में आकर असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर ज्वाइनिंग ली थी। पूर्व की ज्वाइनिंग व पीयू की ज्वाइनिंग काल को जोड़कर देखें तो इन शिक्षकों का अनुभव काफी हो जाता है लेकिन पास्ट सर्विस कई वर्षों से काउंट नहीं होने के कारण यह प्रमोशन नहीं ले पाए। हालांकि कुछ ही शिक्षकों को पहले लाभ दिया गया था। इन शिक्षकों ने कई बार यह मुद्दा उठाया लेकिन सभी शिक्षकों को इसका लाभ नहीं दिया गया। कमेटी बनाई गई लेकिन समय-समय पर निर्णय न हो पाने के कारण यह प्रकरण पेंडिंग होते चले गए।
पुटा के पास करवाने में छूट रहे पसीने
कई शिक्षक सेवानिवृत्ति की ओर हैं लेकिन पास्ट सर्विस काउंट आज तक नहीं की गई। वह बुजुर्ग की श्रेणी में आ गए। उनके जूनियर उनसे सीनियर हो गए लेकिन वह अभी असिस्टेंट प्रोफेसर ही हैं। हैरत तो इस बात की है कि यह शिक्षक पीयू की सभी शर्तें पूरी कर रहे हैं। मानकों को पूरा करने के बाद भी यह केस लटके हुए हैं।
पुटा की ओर से भी यह मुद्दा पुटा चुनाव में उठाया जाता है। घोषणा पत्र में भी उम्मीदवार इस मुद्दे को शामिल करते हैं लेकिन इसको पास करवाने में पसीने छूटते हैं। शुक्रवार को पुटा की ओर से यह मुद्दा फिर उठाया गया था। पीयू के वीसी प्रो. राजकुमार को पत्र लिखा गया। कहा गया कि इस मामले में कमेटी बनी हुई है लेकिन बैठक हो नहीं रही है। अन्य बैठकों की तरह इसकी भी बैठक बुलाई जाए। पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल ने कहा कि इस मुद्दे को पेंडिंग न किया जाए। जल्द से जल्द इस पर निर्णय लिया जाए ताकि शिक्षकों को समय पर लाभ मिल सके।