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पदोन्नति : चार साल बाद 41 पुलिस निरीक्षक बने डीएसपी

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बिना आरक्षण के गृह विभाग ने जारी की पदोन्नति की सूची
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पुलिस के 41 इंस्पेक्टरों को डीएसपी बनाकर पदोन्नति का तोहफा दिया है। हालांकि, पिछले चार साल से यह पदोन्नति लंबित थी। हरियाणा के गृह सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। पुलिस नियमों के मुताबिक आठ साल बतौर इंस्पेक्टर सेवा करने के बाद पदोन्नति होती है। लेकिन 2003 बैच के इंस्पेक्टरों की पिछले चार से पदोन्नति अटकी हुई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के चलते बार-बार पदोन्नति नहीं हो पाई थी। इस संबंध में डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने 27 सितंबर को इंस्पेक्टरों की पदोन्नति के लिए केस मांंगे थे।

ये इंस्पेक्टर बने डीएसपी
राजेश कुमार, वीरेंद्र सिंह, संदीप कुमार, देवेंद्र सिंह, मनोज कुमार, भरतेंद्र कुमार, देविंद्र सिंह, अशोक कुमार, बीरभान, ओमप्रकाश, शैलेंद्र सिंह, अमित कुमार, विशाल, राजबीर सिंह, दिनेश कुमार, जसवंत सिंह, राजदीप मोर, मलकीत सिंह, गुरविंद्र सिंह, जीतेंद्र, हरविंद्र सिंह, राजीव कुमार, संदीप कुमार, अजीत सिंह, जीतेंद्र बेनिवाल, रजनीश यादव, संजय, मदन सिंह, संजीव कुमार, सुरेंद्र सिंह, विकास, दीपक कुमार, अनूप कुमार, भारत भूषण, वीरेंद्र शर्मा, विद्यानंद, ऋषिकांत, विकास कुमार, राजपाल, वजीर सिंह और संजीव गौड़ के नाम शामिल हैं।
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आरक्षण के आधार पर पदोन्नति हाईकोर्ट के फैसले के बाद
हरियाणा सरकार 25 अक्तूबर को राज्य सरकार की ग्रुप ए और बी श्रेणी में अनुसूचित जाति को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने के निर्देश जारी कर चुकी है। पहले पुलिस विभाग ने इसी आधार पर इंस्पेक्टर से डीएसपी के केस मांगे थे और बाकायदा पदोन्नति सूची भी तैयार कर ली थी। लेकिन सिरसा के इंस्पेक्टर कमलदीप ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि वह पहले बैच के हैं और पदोन्नति में आरक्षण देने से उनके जूनियर भी डीएसपी बन रहे हैं, जबकि पहले पदोन्नति का हक वरिष्ठ का बनता है। अब इस मामले में 16 अप्रैल को सुनवाई होनी है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरक्षण के आधार पर पदोन्नति की सूची बाद में जारी की जाएगी।
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