नगर काउंसिल की लापरवाही के चलते कहीं 1400 करोड़ रुपये की लागत से बना इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद न करना पड़ जाए। क्योंकि चाहे कैट-टू हो या कैट थ्री, जब तक एयरफोर्स स्टेशन के 100 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण होते रहेंगे, तब तक इनका कारगर साबित होना मुश्किल है।
मजबूरन कैट टू का काम पूरा होने के बाद भी हर साल सर्दी के मौसम में एयरक्राफ्टों को सिग्नल के अभाव में हवा में लटकना पड़ेगा। क्योंकि इनकी राह का रोड़ा बनेंगी एयरफोर्स स्टेशन के रनवे के 100 मीटर के दायरे में आने वाली बहुमंजिला इमारतें।
रनवे के आसपास पक्षियों का रैन बसेरा
घनी आबादी के पास पक्षियों का रैन बसेरा होता है। लोग पक्षियों को दाना भी डालते हैं। ऐसा ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास बसी घनी आबादी का हाल है, यहां भी पक्षियों का रैन बसेरा है, अक्सर आपको एयरफोर्स स्टेशन के रनवे पर पक्षी उड़ते दिख जाएंगे। ऐसी स्थिति में हवाई जहाज के क्रैश होने की संभावना बढ़ जाती है।
क्योंकि लैंडिंग के दौरान विमान की गति काफी तेज होती है। इस दौरान सामान्य वजन के पक्षी के टकराने के बावजूद पक्षी के संवेग में तेजी से बदलाव होता है। इससे पक्षी और विमान का परस्पर बल बढ़ जाता है। इससे विमान को क्षति पहुंचती है और कई बार यह दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है।
फ्लाइट के क्रैश होते ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट की साख हो जाएगी खराब
अगर एक बार इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हवाई जहाज लैंडिंग के दौरान पक्षियों से टकराने के बाद क्रैश हो गया तो इंटरनेशनल एयरपोर्ट की साख तो खराब होगी ही, लोगों की जान भी जाएगी। ऐसी स्थिति में विमान कंपनियां यहां से फ्लाइटों का संचालन के लिए आगे नहीं आएंगी। अभी तो यहां उतनी फ्लाइटें भी नहीं हैं।
गमाडा ने कार्रवाई कर दी, नगर काउंसिल कब करेगा
गमाडा ने लोगों को एयरफोर्स स्टेशन रनवे के 100 मीटर के दायर में आने वाले अवैध निर्माण को गिरा भी गिरा दिया, लेकिन जीरकपुर नगर काउंसिल के पदाधिकारी अभी तक पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों पर एक कदम भी नहीं चल पाए हैं। जबकि कोर्ट ने अगस्त 2018 में ही नगर काउंसिल से एयरपोर्ट स्टेशन रनवे के 100 मीटर के दायरे में आने वाले अवैध निर्माण की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन पांच माह बीत गए अब तक नगर काउंसिल सुस्त बैठा है।
नगर काउंसिल के अधिकारियों की न खुल जाए पोल
गांव पभात के लोगों की मानें तो आम पब्लिक को इतनी जानकारी नहीं होती कि एयरफोर्स स्टेशन रनवे के 100 मीटर के दायरे में मकान नहीं बनाया जा सकता, लेकिन नगर काउंसिल को तो पता था, तो नगर काउंसिल ने मकान बनाने के लिए नक्शा कैसे पास कर दिया।
वहीं लोगों की मानें तो जब कोर्ट ने एयरफोर्स स्टेशन की रनवे के दायरे में आने वाले कंस्ट्रक्शन की रिपोर्ट मांगी, तो बिना प्रॉपर सिस्टम अडॉप्ट किए नगर काउंसिल ने फटाफट कंस्ट्रक्शन गिरवाने शुरू कर दिए। जबकि लोगों को प्रॉपर नोटिस देकर, उन्हें समय देना चाहिए। क्योंकि नगर काउंसिल के अधिकारियों को डर था कि कहीं वह न फंस जाए, क्योंकि गलत नक्शा तो उन्होंने पास किया है।
कार्यकारी अधिकारी भी बात को टाल गए
जीरकपुर नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी गिरीश वर्मा ने पूछा गया कि एयरफोर्स स्टेशन रनवे के 100 मीटर के दायर में आने वाले मकानों का सर्वे हो चुका है, कितने हैं और इनमें कितने मकान नक्शा पास कर बनाए गए हैं और कितने मकानों का नक्शा पास नहीं है, तो कार्यकारी अधिकारी ने जवाब दिया कि हां सर्वे करवाया जा चुका है, फिर पूछा गया कि 100 मीटर के दायरे में आने वाले कुल कितने मकान हैं तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं है, इसके लिए रिकार्ड देखना पड़ेगा।
अब सवाल ये है कि जिस मसले को लेकर नगर काउंसिल के अधिकारियों को 29 जनवरी को अदालत के समक्ष पेश होना है, उन्हें ये तक नहीं पता कि एयरफोर्स स्टेशन रनवे के 100 मीटर के दायरे में आने वाले कुल कितने मकान हैं तो वो पूरी सर्वे रिपोर्ट कैसे अदालत के समक्ष पेश करेंगे।