पड़ोसी राज्यों से एक्साइज और अन्य टैक्सों में छूट का लाभ उठाने के उद्देश्य से पंजाब से पलायन करने वाले उद्योगों के लिए नया संकट खड़ा हो रहा है। पंजाब सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर को नोटिस कर जवाब मांगा गया है।
इन राज्यों में पंजाब से पलायन करने वाले पुराने उद्योगों (रिलोकेट इंडस्ट्रीज) को राहत पैकेज का लाभ देने पर पंजाब ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार से मिले टैक्स पैकेज का गलत ढंग से उपयोग किया गया। इसके कारण पंजाब से लगभग 18 हजार उद्योग पिछले 7-8 साल में पलायन कर चुके हैं। चैंबर आफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग के प्रेसीडेंट अवतार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की नोटिस का स्वागत करते हुए कहा है कि रिलोकेट होने वाली इंडस्ट्रीज को टैक्स पैकेज का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
पंजाब के उद्योग जगत को इसका भारी नुकसान हुआ है। पड़ोसी राज्यों में टैक्ट पैकेज में छूट से पंजाब में उत्पादित होने वाले प्रोडक्ट की कीमत 15 फीसदी तक ज्यादा हो गई है। इससे पंजाब के उत्पाद मार्केट की चुनौतियों का सामना करने में असफल हैं। खास बात यह है कि लंबे समय से चल रहे मामले में अदालत ने इन राज्यों को कई बार नोटिस जारी किया है, लेकिन अभी तक संबंधित राज्यों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। एक्साइज व अन्य टैक्सों में छूट साल 2002 में जम्मू-कश्मीर और साल 2003 में अन्य राज्यों को दी गई।
इन राज्यों का पैकेज दस साल के लिए था, लेकिन पैकेज की मियाद खत्म होने के बाद राज्यों की मांग पर केंद्र सरकार ने एडेड और अपग्रेेडेड इंडस्ट्रीज के लिए इसे दस साल के लिए बढ़ा दिया। पंजाब ने केंद्र के सर्कुलर का विरोध किया। पंजाब का कहना है कि यह पैकेज नए उद्योगों के लिए दिया जा सकता है। इससे पंजाब के उद्योगों को भारी नुकसान के अलावा बेरोजगारी की समस्या बढ़ रही है।