कोरोना से पूरी दुनिया परेशान है। हर देश, राज्य, जिलों व गांवों में यह दस्तक दे चुका है। चंडीगढ़ भी इससे अछूता नहीं रहा। हर सेक्टर से लेकर गलियों तक यह पहुंचा। तेजी से इसका प्रसार भी हो रहा है, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस इससे बचा हुआ है। इसके पीछे पीयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. अश्वनी कौल का बड़ा हाथ है। चार माह से बिना थके वह लगातार काम कर रहे हैं। यही नहीं उनके संघर्ष में 225 सुरक्षा कर्मी भी पूरा साथ दे रहे हैं।
कैंपस 550 एकड़ से अधिक में बसा हुआ है। यहां 70 से अधिक विभाग और 22 हॉस्टल हैं। इसके अलावा दो हजार से अधिक आवास हैं। इन आवासों में इतने ही परिवार रहते हैं। लोगों की संख्या गिनी जाए तो कम से कम पांच हजार लोग कैंपस में रहते हैं। कोरोना को लेकर हर कहीं खौफ है। इसका असर पीयू में भी दिखा। भारत सरकार ने कोरोना की दस्तक के बाद आदेश जारी कर दिए कि हर कोई अलर्ट हो जाएं। ऐसे में पीयू की सुरक्षा पीछे कैसे रहती।
17 मार्च को ही पीयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. अश्वनी कौल ने मोर्चा संभाल लिया। साथ ही शारीरिक दूरी का ख्याल रखते हुए उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की और कैंपस को कोरोना के बचाने की रणनीति तैयार की। कहा कि अब तक सुरक्षा कर्मी पीयू कैंपस के लोगों को सिक्योरिटी मुहैया करा रहे थे, लेकिन अब लड़ाई कोरोना के खिलाफ है। इससे लोगों को बचाना है। 225 सुरक्षा कर्मियों का रोस्टर तैयार किया और उनकी ड्यूटी उसी तरह लगाई जैसे कोई परिंदा भी पर न मार सके।
प्रो. अश्वनी कौल लगभग चार माह तक 24 घंटे पीयू की सुरक्षा में पूरी तरह मुस्तैद रहे। उन्होंने एक भी अवकाश नहीं लिया। कर्फ्यू, लॉकडाउन में वह खुद कैंपस में चारों ओर राउंड लगातार रहे। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। लोगों को जागरूक किया। लगातार काम कर रहे सुरक्षा कर्मियों के बारे में उन्होंने सोचा। उन्होंने फिर रोस्टर तैयार कर एक-एक सुरक्षा कर्मी को अवकाश भी दिया ताकि वह स्वस्थ भी रहें। आज प्रो. कौल की मेहनत रंग ला रही है। क्योंकि कोरोना चारों ओर पैर पसार रहा है लेकिन पीयू में प्रवेश नहीं होने दिया। पीयू के तीनों गेटों पर सघन चेकिंग होती है। स्वस्थ व्यक्ति को ही आने की अनुमति दी जाती है।
पीयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. अश्वनी कौल ने कहा कि कोरोना ने पीयू में दस्तक नहीं दी है। लॉकडाउन व कर्फ्यू में सुरक्षा पूरी चाक-चौबंद रही। बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं होने दिया। साथ ही लोगों को जागरूक भी किया। इस संघर्ष में 225 सुरक्षा कर्मियों का भी बड़ा योगदान रहा है।