फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां गरीब बच्चों का हक मार रहें हैं प्राइवेट स्कूल

Sun, 09 Feb 2014 10:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा के निजी स्कूल संचालक प्रदेश सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने पर आमादा हो गए हैं। संचालकों ने खुले तौर पर ऐलान किया है कि वे स्कूल एजूकेशन रूल्स की धारा 134ए के तहत 10 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला नहीं देंगे।
विज्ञापन


संचालकों ने यह भी कहा है कि अगर सरकार दाखिला दिलवाना चाहती है तो उसके बदले स्कूल प्रबंधकों को फीस दे। धारा 134ए में प्रावधान है कि पहली से 12वीं कक्षा तक गरीब बीपीएल परिवारों के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया जाएगा।

फेडरेशन आफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान कुलभूषण शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि केंद्र ने जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया है, उसके तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर दाखिला देने का प्रावधान है। लेकिन हरियाणा सरकार ने गरीब बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाकर उनका हक मार लिया।
विज्ञापन


उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में दो तरह के कानून चल रहे हैं। आरटीई के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिले का प्रावधान है जबकि स्कूल एजूकेशन नियमों में भी पहली से बारहवीं कक्षा तक 10 फीसदी वाला कानून लागू किया गया है। ऐसे में दो कानून एक साथ क्यों चलाए जा रहे हैं।

एसोसिएशन ने घोषणा की कि राज्य सरकार की नीति प्राइवेट स्कूलों को बंद कराने की है, इसलिए 15 फरवरी को दिल्ली में जंतर-मंतर पर स्कूल संचालक एक दिन का धरना देंगे और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ज्ञापन देकर बताएंगे कि हरियाणा में आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला न दिलाकर उनका हक मारा जा रहा है।

स्कूल एजूकेशन रूल्स के तहत प्राइवेट स्कूलों की कमर तोड़ी जा रही है। अगर सरकार को 10 फीसदी बच्चे 134ए के तहत पढ़वाने हैं तो सरकार उनकी फीस अदा करे। अन्यथा वे दाखिला नहीं देंगे चाहे सरकार जो मर्जी करे।

नहीं दी वेबसाइट पर जानकारी
एलिमेंटरी एजूकेशन के महानिदेशक डी. सुरेश ने सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों को निर्देश दिए थे कि जनवरी, 2014 के अंत तक 134ए के तहत दाखिला दिए जाने वाली सीटों की जानकारी निदेशालय की वेबसाइट पर अपलोड करें और स्कूलों की वेबसाइट पर भी डालें। मगर अधिकतर स्कूलों ने यह जानकारी ही नहीं।

गरीब बच्चों का हक मार रहे निजी स्कूल : सुरीना राजन
स्कूल शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सुरीना राजन ने कहा है कि प्राइवेट स्कूल संचालक गरीब बच्चों का हक मार रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ बैठक में माना था कि 134ए के तहत गरीब बच्चों का दाखिला 25 से घटाकर 10 फीसदी कर दिया जाए, तो वे दाखिला दे देंगे। मगर अब वे अपनी जिम्मेवारी से भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत केंद्र से प्राइवेट स्कूलों के लिए एक  पैसा भी नहीं मिला है।


हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करें निजी स्कूल : सत्यवीर हुड्डा
चंडीगढ़। हरियाणा स्कूल एजूकेशन रूल्स की धारा 134ए के तहत गरीब बच्चों को दाखिला दिलवाने के लिए अदालत में याचिका दायर करने वाले एडवोकेट सत्यवीर हुड्डा ने कहा कि प्राइवेट स्कूल संचालक हाईकोर्ट के फैसले की पालना करें। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल की खंडपीठ ने गत 20 नवंबर को फैसला सुनाया था कि सरकार दस फीसदी गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करे। इस फैसले को लागू करवाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेवारी थी कि वे समाचार पत्रों प्राइवेट स्कूलों की गरीब बच्चों को दाखिला दिलाने वाली खाली सीटों और फीस माफी का विज्ञापन अखबारों में देंगे ताकि आम जनता तक यह सूचना पहुंच जाए। मगर आज तक यह विज्ञापन नहीं दिया। इससे साफ है कि सरकार की नीयत में खोट है। सरकार प्राइवेट स्कूलों की तरफ है और शिक्षा विभाग खुद जिम्मेवार है।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें