हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि जो अभिभावक फिलहाल लॉकडाउन के कारण खराब आर्थिक स्थिति में हैं और फीस नहीं दे सकते हैं। इस संबंध में हाईकोर्ट ने अभिभावकों को स्कूल में अर्जी दिए जाने का आदेश दिया है और निजी स्कूलों को कहा है कि अगर उनके पास ऐसी अर्जी आती है तो वे इस पर संवेदनशीलता से गौर कर निर्णय लें। चाहे तो फीस माफ की जा सकती है या बाद में ली जा सकती है। इसके बावजूद भी अगर स्कूल कुछ नहीं करते हैं तो अभिभावक रेगुलेटरी बॉडी के समक्ष अपनी मांग रख सकते हैं।
आर्थिक तंगी का सामना कर रहे निजी स्कूल, जिला शिक्षा अधिकारी को दे जानकारी
हाईकोर्ट ने आर्थिक संकट का सामना कर रहे निजी स्कूलों को भी राहत देते हुए कहा है कि वे अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष अपनी वित्तीय स्थिति की जानकारी देते हुए जरूरी दस्तावेज जमा करवाएं। उस पर गौर कर जिला शिक्षा अधिकारी तीन सप्ताह में फैसला करेंगे। निजी स्कूल ऐसा तभी कर पाएंगे अगर उनकी आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब है और उनके पास कोई रिजर्व फंड नहीं है।