हरियाणा के निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस वर्ग के मेधावी छात्रों के दाखिले को लेकर छिड़े विवाद में एक और पेंच फंस गया है। गैर सहायता प्राप्त स्कूलों और सीबीएसई स्कूलों के संगठनों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दाखिला प्रक्रिया का विरोध किया है। जस्टिस आरके जैन की एकल बेंच ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी है।
संगठनों ने एडवोकेट पवन मैणी के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट ने दूसरी से आठवीं तक की कक्षाओं में निजी स्कूलों को 10 फीसदी सीटें ईडब्ल्यूएस कोटे के लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने कोटा बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है। आरोप है कि सरकार अपने स्तर पर यह कोटा नहीं बढ़ा सकती, यह नियमों का उल्लंघन है। दूसरा आरोप है कि हाईकोर्ट ने आरटीई नियमों के अनुसार ही स्कूलों को ईडब्ल्यूएस छात्रों की पढ़ाई के खर्च की रिइंबर्समेंट का निर्देश दिया था, लेकिन हरियाणा सरकार ने यह खर्च सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के खर्च के हिसाब से देने का प्रावधान बनाया है।
याचिका में कहा है कि सरकार के हिसाब से निजी स्कूलों को मिलने वाली रिइंबर्समेंट नाममात्र होगी, ऐसे में स्कूल अपने खर्च पर ईडब्ल्यूएस छात्रों को कैसे पढ़ा सकेंगे। तीसरा मुद्दा ईडब्ल्यूएस वर्ग के मेधावी छात्रों की चयन प्रक्रिया का उठाया गया है। इसमें कहा है कि एक ओर स्कूलों में 10 सीजीपीए के हिसाब से दाखिले हो रहे हैं, दूसरी ओर हरियाणा सरकार ने मेधावी छात्रों के लिए जो टेस्ट रखा है, उसमें 55 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्रों को मेधावी माना जा रहा है, जो कि गलत है।
याचिका में कहा है कि यह प्रक्रिया बदली जानी चाहिए। इन तथ्यों के साथ हाईकोर्ट से मांग की गई है कि सरकार की ओर से मेधावी छात्रों के चयन के लिए आयोजित टेस्ट को रद्द किया जाना चाहिए और रिइंबर्समेंट व आरक्षण की सीटों का कोटा हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले के मुताबिक तय किया जाना चाहिए।